असम चुनाव में ‘तीर-कमान’ के साथ मैदान में उतरेगा JMM, क्या कांग्रेस से गठबंधन होगा?
असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो ने अब असम में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो ने अब असम में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी को चुनाव आयोग से उसका पारंपरिक ‘तीर-धनुष’ (तीर-कमान) चुनाव चिन्ह मिल गया है, जिसे रणनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार झामुमो असम की 20 से 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में था। 23 मार्च नामांकन की अंतिम तिथि है। ऐसे में पार्टी ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय असम में कैंप कर रहे हैं। वहीं, रविवार की रात पार्टी का अकेले चुनाव में उतरने का फैसला हुआ। 19 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया गया।
कांग्रेस से गठबंधन पर तस्वीर साफ नहीं थी
असम चुनाव में गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। हालांकि कांग्रेस और झामुमो में सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी थी। हाल ही में असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर संभावित प्री-पोल गठबंधन पर चर्चा की थी।
इधर, दोनों दलों की ओर से आलाकमान के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा था। हालांकि, झामुमो नेताओं का कहना था कि अगर गठबंधन में सम्मानजनक सीटें नहीं मिलती हैं तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ने से भी वही पीछे नहीं हटेंगे। विनोद पांडेय ने साफ कहा था कि झामुमो असम में मजबूती से चुनाव लड़ेगा और भाजपा को कड़ी टक्कर देगा। झामुमो को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दिलाने के लिए चुनाव लड़ना बेहद जरूरी है।
क्या कांग्रेस से गठबंधन होगा?
गौरतलब है कि झारखंड में झामुमो, कांग्रेस और राजद साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं, जबकि असम में भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। ऐसे में झामुमो की एंट्री असम की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि झामुमो कांग्रेस के साथ गठबंधन करता है या अकेले मैदान में उतरता है। दोनों ही स्थितियों में असम का चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
आदिवासी और टी-ट्राइब वोट बैंक पर फोकस
झामुमो की रणनीति असम के चाय बागान (टी ट्राइब) और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है। पार्टी झारखंड मॉडल और आदिवासी मुद्दों को सामने रखकर इन समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। असम की 126 सीटों वाली विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जिन पर झामुमो की खास नजर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही असम में रैलियां कर आदिवासी एकजुटता का आह्वान कर चुके हैं और इसे चुनावी एजेंडा बनाने में जुटे हैं।




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