अन्ना आंदोलन को RSS ने फंड किया था? इन आरोपों पर AAP सांसद संजय सिंह ने दिया जवाब
सरकारी भ्रष्टाचार रोकने के लिए साल 2011 में चलाए गए अन्ना आंदोलन को RSS द्वारा फंड किया गया था, ऐसे आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रतिक्रिया दी है।

सरकारी भ्रष्टाचार रोकने के लिए साल 2011 में चलाए गए अन्ना आंदोलन को RSS द्वारा फंड किया गया था, ऐसे आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बेबुनियाद बताया है। संजय सिंह ने अन्ना आंदोलन के साथी रहे प्रशांत भूषण (नाम लिए बगैर) पर पलटवार करते हुए कहा- कौन से लोग हैं, जो आडवाणी जी से मिलने के लिए दवाब बना रहे थे? कौन सा वो व्यक्ति है, जो इसका विरोध कर रहा था?
आप सांसद संजय सिंह ने क्या जवाब दिया?
अन्ना आंदोलन को RSS ने फंड किया था या नहीं, इसका जवाब संजय सिंह ने इंडिया टुडे को दिए हालिया इंटरव्यू में दिया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा- क्या RSS ने संजय सिंह को सुल्तानपुर में जाकर पकड़ लिया कि जाकर आंदोलन करो? क्या अमेठी में जाकर पकड़ लिया कि आंदोलन करो? संजय सिंह ने आगे कहा- इसमें कोई सत्यता नहीं है। ये खुद से पैदा हुआ आंदोलन था। अन्ना जी को किसी ने नहीं पकड़ा कि जाकर आंदोलन करो।
नाम लिए बगैर प्रशांत भूषण से किए सवाल
संजय सिंह ने तर्क देते हुए कहा- अन्ना जी पहले से ही आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ पहले भी आंदोलन किए थे। क्या कांग्रेस ने अपने ही खिलाफ उन्हें आंदोलन करने के लिए तैयार किया? मान लीजिए वो आरएसएस और भाजपा द्वारा फंडिड थे, तो महाराष्ट्र में मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई? अरविंद केजरीवाल भी आरएसएस फंडिड थे, प्रशांत भूषण द्वारा लगाए गए इस आरोप पर सांसद ने कहा- उन्हें कहने दीजिए। इस पर संजय सिंह ने आगे कहा- एक बार उनसे पूछिए, कौन आडवाणी से मिलने के लिए दवाब बना रहा था? कौन इसका विरोध कर रहा था?
एक नजर अन्ना आंदोलन पर
आपको बताते चलें कि अन्ना आंदोलन साल 2011 में हुआ था। इसे अन्ना हजारे एंटी करप्शन मूवमेंट भी कहा जाता है। यह आंदोलन भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन था, जिसका नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने किया था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनलोकपाल बिल को लागू कराना था, ताकि उच्च स्तर के भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक स्वतंत्र संस्था बनाई जा सके। इस आंदोलन के दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान समेत देशभर में हजारों लोग जुड़े थे। इसने युवाओं और मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था। इसके बाद सरकार पर भ्रष्टाचार विरोधी कानून लाने का दबाव बना था।




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