सरकार महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, सत्ता हासिल करना चाहती है : कमलेश
रांची में कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल पर केंद्र सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन करना चाहती है, जिसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर है, तो 2023 में पारित विधेयक को तुरंत लागू किया जाए।

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी। सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे, ताकि इसकी आड़ में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सके। सरकार की ओर से जो साजिश रची गयी, उसका उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था। उन्होंने कहा कि भाजपा खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती है।
उनकी सोच यह थी कि यदि बिल पारित नहीं हुआ, तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ उठा लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर केंद्र की सरकार गंभीर है, तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित विधेयक को तुरंत लागू किया जाए। लोकसभा की वर्तमान सीटें 543 में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए सरकार 2029 के आम चुनाव में कदम बढ़ाये। विपक्ष समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मोदी-शाह की जोड़ी ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का एक घृणित प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पहले जनगणना फिर डिमिलिटेशन उसके बाद महिला आरक्षण की बात को विपक्षी दलों ने मान लिया था, लेकिन इसमें सरकार को संशोधन की जरूरत महसूस हुई। एससी-एसटी की तर्ज पर ओबीसी को भी संसद व विधानसभा में आरक्षण मिले। प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो, मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी, कार्यालय प्रभारी अभिलाष साहू, सह-कार्यालय प्रभारी राजन वर्मा शामिल थे।महिला आरक्षण पर राजनीतिक ढोंग कर रहा केंद्र : प्रदीव यादवकांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, तब इस विधेयक की क्या जरूरत थी। 2023 के विधेयक में स्पष्ट था कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और परिसीमन के आधार पर महिला आरक्षण होना था। एकाएक महिला आरक्षण विधेयक को लाना केन्द्र सरकार की गहरी राजनीतिक चाल परिसीमन का हिस्सा था। केन्द्र सरकार यह जानती है कि जब जनगणना होगी, तब जातियों की संख्या सामने आयेगी, एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक का दबाव बढ़ेगा। उन्हें भी आरक्षण देना पड़ेगा।केंद्र सरकार का फूंटा भांडा : दीपिकाग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि महिला विधेयक की आड़ में परिसीमन का खेल खेलनी वाली भाजपा सरकार का भांडा फूट चुका है। जो अंक गणित केंद्र की सरकार ने अगले चुनाव के लिए परिसीमन के बहाने सेट किया था, उसको यूपीए गठबंधन ने डिकोड कर दिया है। यही वजह है कि पिछले 12 साल से केंद्र में शासन कर रही भाजपा की अगुवाई वाली सरकार पहली बार लोकसभा में विधेयक गिर जाने से तिलमिलाई हुई है। वो बेचैन है, क्योंकि पहली बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। देश के प्रधानमंत्री महिला आरक्षण और सम्मान के नाम पर अपने भविष्य को लेकर सत्ता पर काबिज रहने का एक षड्यंत्र रचा था, जो पूरी रह धराशाही हो चुका है।
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