Health Department on High Alert for Heatwave in Palamu District लू पीड़ितों के बचाव के लिए सभी अस्पताल में कर दी गई डेडिकेटेड बेड की व्यवस्था : सिविल सर्जन, Palamu Hindi News - Hindustan
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लू पीड़ितों के बचाव के लिए सभी अस्पताल में कर दी गई डेडिकेटेड बेड की व्यवस्था : सिविल सर्जन

पलामू जिले में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट मोड में आ गया है। मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज में लू पीड़ितों के लिए विशेष बेड उपलब्ध कराए गए हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और आपात चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Tue, 21 April 2026 11:35 PMNewswrap हिन्दुस्तान, पलामू
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लू पीड़ितों के बचाव के लिए सभी अस्पताल में कर दी गई डेडिकेटेड बेड की व्यवस्था : सिविल सर्जन

मेदिनीनगर, संवाददाता। पलामू जिले में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। जिले के मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमआरएमसीएच) में लू पीड़ितों के लिए 10 डेडिकेटेड बेड सुनिश्चित करने के अलावा छतरपुर व हुसैनाबाद के अनुमंडलीय अस्पताल व सीएचसी में 5-5, सभी पीएचसी में 2-2 व सभी आयुष्मान आरोग्य केंद्र में एक-एक बेड व्यवस्थित की गई है। पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल श्रीवास्तव मंगलवार को प्रेस प्रतिनिधियों को मंगलवार को बताया कि लू से निपटने के लिए जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में में समुचित तैयारी कर ली गई है।

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सभी जगह दवाइयों, बेड, पेयजल और आपात चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ ओआरएस कार्नर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य विभाग पूरे अलर्ट मोड में है परंतु अचानक बढ़ गई गर्मी को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को भी सर्तक रहने की जरूरत है। खानपान और पहनावा को गर्मी के अनुकूल रखने, शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने और लू लगने की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज प्राप्त करने की जरूरत है।उन्होंने बताया कि लू और तेज गर्म हवाओं का असर शरीर पर गंभीर पड़ता है। इससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, उल्टी, तेज बुखार और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में हृदय आघात और मस्तिष्क आघात का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। लू से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। साथ ही ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल, नींबू पानी, छाछ, आम का पना, तरबूज और खीरा जैसे तरल पदार्थों का सेवन करते रहना चाहिए। ओआरएस घोल एक लीटर साफ पानी में घोलकर 24 घंटे के भीतर उपयोग करना चाहिए।उन्होंने लोगों को सलाह दी कि तेज धूप में निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो सिर ढंककर निकलें और हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। छाता, टोपी या गमछे का उपयोग भी लाभदायक है। लू लग जाए तो उसे तुरंत छांव में लिटाकर शरीर को ठंडा करें और गीले कपड़े से पोंछें। सुधार न होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। डॉ. रवि और डॉ. अनूप कुमार भी सिविल सर्जन के साथ मौजूद रहकर प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

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