टीका लगाने के बाद नवजात की मौत, झारखंड में गुस्साए परिजनों का जमकर हंगामा
झारखंड में टीका लगाने के बाद एक नवजात की मौत की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि बच्चे को टीका लगवाने के बाद परिजन उसे घर ले गए, जहां कुछ देर बाद उसका रंग नीला पड़ गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

झारखंड में टीका लगाने के बाद एक नवजात की मौत की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि बच्चे को टीका लगवाने के बाद परिजन उसे घर ले गए, जहां कुछ देर बाद उसका रंग नीला पड़ गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
जमशेदपुर के मानगो गुरुद्वारा बस्ती निवासी बिट्टू रवानी के तीन दिन के नवजात (बेटा) की सोमवार को मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि एमजीएम अस्पताल में बीसीजी का टीका लगवाया गया था। घर ले जाने पर तबीयत बिगड़ गई और मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल में जाकर हंगामा किया। इधर, अस्पताल में बताया गया कि उसी वॉयल (सीसी) से अन्य कई बच्चों को टीका दिया गया, जो स्वस्थ हैं।
रंग नीला पड़ गया
जमशेदपुर में सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे नवजात को बीसीजी टीका दिलाने के लिए एमजीएम अस्पताल लाया गया था। करीब 11:15 बजे बच्चे को टीका लगाया गया। परिजन बच्चे को घर लेकर पहुंचे, जहां कुछ देर बाद उन्हें धड़कन महसूस नहीं हुई और रंग नीला पड़ गया। आनन-फानन में दोपहर करीब 3 बजे बच्चे को एमजीएम इमरजेंसी वार्ड लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
परिजनों ने टीका लगाने वाली नर्स को सामने लाने और निष्पक्ष जांच की मांग कर हंगामा किया। सूचना पर विकास सिंह भी समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे। विकास सिंह ने कहा कि यह गंभीर मामला है। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही वे अस्पताल जाकर नवजात को देखकर आए थे और बच्चा स्वस्थ था। ऐसे में अचानक हुई मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अपर मुख्य सचिव से की जाएगी शिकायत
हंगामे की सूचना पर पहुंचे एमजीएम थाना के एएसआई को थाना प्रभारी के नाम परिजनों ने कार्रवाई के लिए लिखित आवेदन दिया। इस बीच परिवार के सदस्य द्वारा बच्चे की सांस चलने की बात कहने पर दोबारा जांच कराई गई, पर मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजन रोते बिलखते घर लौट गए। बताते हैं कि बिट्टू रवानी का यह दूसरा बच्चा था और इस बार बेटे ने जन्म लिया था।
बीसीजी टीका से रिएक्शन नहीं होता
फिजिशियन एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एके मिश्रा का कहना है कि बीसीजी का टीका तभी दिया जाना चाहिए, जब बच्चा कम से कम 2.5 किलो का है। यदि उससे कम है तो वजन बढ़ने का इंतजार करना चाहिए। इससे मौत हो सकती है या नहीं, देखना होगा। गलत जगह पर टीका लगा हो तब नुकसान कर सकता है या फिर और कोई और बीमारी भी मौत का कारण हो सकती है। बीसीजी टीका से कोई रिएक्शन नहीं होता है। वहीं, एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा का कहना है कि बीसीजी के टीका का साइड इफेक्ट नहीं होता है। बच्चों की मौत के बहुत सारे कारण होते हैं।
बच्चे का वजन कम होने पर डॉक्टर से पूछने को कहा था
सूत्रों ने बताया कि जब परिजन बच्चे को टीका के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां सिस्टर ने कहा कि बच्चा कमजोर लग रहा है, इसे टीका लगाया जाए या नहीं जाकर डॉक्टर से पूछकर आइए। इसपर परिजनों ने कहा कि टीका लगाइए कुछ नहीं होगा। नर्स की जिद करने पर परिजन चले गए और थोड़ी देर बार आकर कहा कि डॉक्टर ने कहा है कि टीका लगा दीजिए। हालांकि परिजनों ने डॉक्टर का लिखित नहीं दिखाया गया और न ही नर्स ने मांग की।




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