ढुलमुल नीति उचित नहीं, HC का झारखंड सरकार को जीएसटी मामले में अंतिम मोहलत; चेतावनी भी दी
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को नए उद्योगों को जीएसटी लाभ देने में हो रही देरी पर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने इसके लिए सरकार को 30 दिन की अंतिम मोहलत दी है। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि इस अवधि में लाभ नहीं दिया गया तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को नए उद्योगों को जीएसटी लाभ देने में हो रही देरी पर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने इसके लिए सरकार को 30 दिन की अंतिम मोहलत दी है। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि इस अवधि में लाभ नहीं दिया गया तो अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
वैध दावों का लाभ अविलंब दिया जाना चाहिए
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में नए उद्योगों को औद्योगिक नीति 2016 और 2021 के तहत जीएसटी (राज्य कर) लाभ देने में हो रही देरी पर राज्य सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि सरकार की ढुलमुल नीति उचित नहीं है और नए उद्योगों को उनके वैध दावों का लाभ अविलंब दिया जाना चाहिए।
शपथपत्र दाखिल करने का आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी ( एचपीसी) को अंतिम अवसर देते हुए 30 दिनों मे उद्योगों के दावों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव, जो कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, को व्यक्तिगत रूप से 12 जून तक अनुपालन संबंधी शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।
दायित्व से बचने का प्रयास कर रही कमेटी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कमेटी मामलों में निर्णय लेगी, लेकिन तथ्यात्मक जांच के लिए उद्योग निदेशालय की सहायता ली गई है। इस पर खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कमेटी स्वयं निर्णय लेने के बजाय उद्योग निदेशालय पर जिम्मेदारी डालकर अपने दायित्व से बचने का प्रयास कर रही है।
अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अतिरिक्त अवधि के भीतर निर्णय लेकर संबंधित पक्षों को सूचित नहीं किया गया तो कमेटी के सदस्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि पूर्व में 23 दिसंबर 2025 और छह जनवरी 2026 को पारित आदेशों में कमेटी को 31 जनवरी अथवा 15 फरवरी 2026 तक मामलों में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कमेटी ने न तो आदेश का पालन किया और न ही अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया।
याचिकाकर्ताओं पर मढ़ने का प्रयास
खंडपीठ ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि याचिकाकर्ता उद्योगों से अतिरिक्त दस्तावेज अप्रैल में मांगे गए, जबकि अदालत की तय समयसीमा फरवरी में ही समाप्त हो चुकी थी। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया आदेश के अनुपालन से बचने और दोष याचिकाकर्ताओं पर मढ़ने का प्रयास बताया।




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