उमसभरी गर्मी में घंटों बिजली गुल, विभाग के प्रति लोगों में गुस्सा फुल
झुमरी तिलैया में भीषण गर्मी के कारण बिजली की अनियमित आपूर्ति लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। कई इलाकों में 24 घंटे में महज 17 से 18 घंटे बिजली मिल रही है, जिससे व्यापार और जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। लोग गर्मी में बिना बिजली के परेशान हैं, खासकर दोपहर के समय।

झुमरी तिलैया, निज प्रतिनिधि भीषण गर्मी के बाद बढ़ी उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ऐसे में अनियमित बिजली आपूर्ति आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बार-बार बिजली कटौती की शिकायतें मिल रही हैं। कई इलाकों में 24 घंटे में महज 17 से 18 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। हल्की बारिश या बूंदाबांदी होते ही ब्रेकडाउन के नाम पर घंटों आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। गुरुवार को दिनभर देवी मंडप रोड के लोटा फैक्ट्री चौक पर दर्जनों घरों की बिजली बाधित रही। लोगों ने कई बार शिकायत तक की, मगर कोई हल नहीं निकला।
बिजली की अनियमितता
डीवीसी केटीपीएस द्वारा की जा रही लोडशेडिंग का भी बिजली व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। वहीं बढ़ती गर्मी के कारण ट्रिपिंग और फ्यूज उड़ने जैसी समस्याएं भी बढ़ गई हैं। झुमरी तिलैया शहर में सामान्य दिनों में जहां रोजाना 10 से 15 लोकल फॉल्ट की शिकायतें मिलती थीं, वहीं मई और जून में यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 25 तक पहुंच गई है।
समस्या के कारण
लोडशेडिंग के बाद लोकल फॉल्ट दूर करने के लिए सुबह 9 से 10 बजे तथा शाम 4 से 5 बजे तक एक-एक घंटे बिजली काटी जाती है। इसके अलावा अन्य तकनीकी कारणों से भी आपूर्ति प्रभावित होती रहती है। अनुमान के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में औसतन 18 घंटे जबकि ग्रामीण इलाकों में 12 से 15 घंटे बिजली मिल रही है। लोगों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के कार्य कराए जाने से उनकी दिनचर्या बाधित हो रही है।
दिन में बिजली कटौती
लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि दोपहर के समय, जब गर्मी और उमस चरम पर होती है, उसी दौरान मेंटेनेंस या मरम्मत के नाम पर बिजली काट दी जाती है। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। पंखे और कूलर बंद होने से लोगों को घंटों गर्मी में रहना पड़ता है।
व्यापार पर प्रभाव
अनियमित बिजली आपूर्ति का असर व्यापार और छोटे उद्योगों पर भी पड़ रहा है। वेल्डिंग, फोटोस्टेट, साइबर कैफे, प्रिंटिंग प्रेस, आटा चक्की, मोबाइल रिपेयरिंग, कोल्ड ड्रिंक और डेयरी उत्पादों से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से उनका काम प्रभावित हो रहा है। कई बार मशीनें बंद हो जाती हैं और ग्राहकों को लौटना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पेयजल की समस्या
बिजली कटौती का सीधा असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई मोहल्लों और गांवों में मोटर नहीं चल पाने से पानी की टंकियां खाली रह जाती हैं। नगर क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है क्योंकि निर्धारित समय पर जलमीनारों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाता। परिणामस्वरूप लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चिंताजनक बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि बिजली की अनियमितता के कारण सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। वहीं रात में बार-बार बिजली आने-जाने से लोगों की नींद भी पूरी नहीं हो पा रही है।
लोगों की प्रतिक्रिया
क्या कहते हैं लोग
सरोज कुमार ने कहा कि एक तो गर्मी में घंटों बिजली गुल रहती है और जब आती भी है तो लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। दुकान में रखे फ्रिज और अन्य उपकरण सही से नहीं चल पाते, जिससे ग्राहकों को ठंडे पेय नहीं मिल पाते और वे वापस लौट जाते हैं।"
कैलाश गुप्ता ने कहा दिन में कई बार बिजली चली जाती है। दुकान में कंप्यूटर और फोटोस्टेट मशीन समेत अन्य उपकरण बंद हो जाते हैं, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।
ऋषिकांत पांडेय ने कहा कि गर्मी में घंटों बिजली नहीं रहने से घर में रहना मुश्किल हो जाता है। पानी की भी समस्या हो जाती है। समय पर जलापूर्ति नहीं होने से जलसंकट की स्थिति बन रही है।
एक छात्र ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है। रात में बिजली कटने से गर्मी में पढ़ाई नहीं हो पाती। लो वोल्टेज के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी सही तरीके से नहीं चल पाते।
विभाग की स्थिति
क्या कहता है विभाग
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों पर लाइन मरम्मत, ट्रांसफॉर्मर पर बढ़े लोड और अन्य तकनीकी कारणों से आपूर्ति प्रभावित हो रही है। विभाग का दावा है कि जहां-जहां समस्या है, वहां मरम्मत कार्य कराया जा रहा है और जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा। अधिकारियों के अनुसार बारिश और तेज हवा के दौरान सुरक्षा कारणों से भी कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति रोकनी पड़ती है।
आवश्यकता बनाम आपूर्ति
90 मेगावाट की आवश्यकता, लगभग 70 मेगावाट आपूर्ति
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के पीकआवर में पूरे जिले को करीब 90 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में लगभग 70 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है। बताया कि डीवीसी से विभाग का 68 मेगावाट बिजली लेने का अनुबंध है, कभी-कभी 74 मेगावाट तक आपूर्ति मिल जाती है। अगस्त तक योजना का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है, जिसमें अब तक करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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