झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक को मिली मंजूरी, अब गवर्नर और सीएम मिलकर करेंगे वीसी की नियुक्ति
झारखंड में अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री अब संयुक्त रूप से विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) और प्रति कुलपति (प्रोवीसी) के पदों पर नियुक्ति करेंगे। राज्यपाल संतोष गंगवार ने इससे संबंधित ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026’ को शुक्रवार को मंजूरी दी।

झारखंड में अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री अब संयुक्त रूप से विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) और प्रति कुलपति (प्रोवीसी) के पदों पर नियुक्ति करेंगे। राज्यपाल संतोष गंगवार ने इससे संबंधित ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026’ को शुक्रवार को मंजूरी दी। यह विधेयक इसी साल 17 मार्च को विधानसभा से पारित हुआ था।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) और प्रति कुलपति (प्रोवीसी) के पदों पर नियुक्ति को लेकर इसी साल मानसून सत्र में पारित विधेयक में नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल सह कुलाधिपति से लेकर राज्य सरकार को देने का प्रावधान किया गया था। इसपर राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। राज्यपाल ने विधेयक वापस करते हुए समीक्षा और विधिक राय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद मार्च में बजट सत्र में दोबारा पारित कराया गया। विधेयक का मुख्य उद्देश्य सभी विश्वविद्यालयों में प्रशासन, शासन और शैक्षणिक मानकों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
शैक्षणिक मानकों में एकरूपता विधेयक का मुख्य उद्देश्य
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 के माध्यम से एकीकृत ढांचे के तहत लाया जाएगा। राज्य में दी जाने वाली उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को मानकीकृत और उन्नत करना है। इसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम को एकीकृत करना, शिक्षण पद्धतियों में सुधार और एक समान शैक्षणिक मानक सुनिश्चित करना है। इस विधेयक का एक बड़ा लक्ष्य विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। शैक्षणिक मूल्यांकन और मान्यता प्रक्रियाओं के मानकीकरण से राज्य के विश्वविद्यालयों द्वारा दी जाने वाली डिग्रियों का मूल्य और विश्वसनीयता स्थिर रहेगी, जिसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा। इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों, विशेषज्ञ संकायों और आधुनिक सुविधाओं (पुस्तकालय, प्रयोगशाला आदि) की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच हो पाएगी।
खोज के लिए बनाई जाएगी समिति
कुलपति पद पर चयन के लिए एक खोज समिति बनाई जाएगी। समिति तीन से 5 नामों का पैनल तैयार कर कुलाधिपति (राज्यपाल) व सीएम के पास भेजेगी। इसी में एक का चयन वीसी पद पर होगा। कुलाधिपति औपचारिक नियुक्ति करेंगे। चयन नहीं होने पर नई सूची मांगी जा सकती है।
कुलाधिपति खोज समिति के अध्यक्ष को करेंगे नामित
कुलपति के चयन के लिए बनने वाली खोज समिति के अध्यक्ष को कुलाधिपति नामित करेंगे। अध्यक्ष कोई प्रतिष्ठित शिक्षाविद होंगे। वहीं राज्य सरकार केंद्रीय विवि के एक शिक्षाविद को सदस्य नामित करेगी। यूजीसी का प्रतिनिधि और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव सदस्य होंगे। संबंधित विवि के कुलसचिव सचिव होंगे। हालांकि उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। सदस्यों का उस विवि से संबंध नहीं होगा।




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