…तो जेब से भरने होंगे 10 हजार रुपए; किस मामले को लेकर राज्य सरकार पर भड़का झारखंड हाई कोर्ट
कोर्ट ने राज्य सरकार को आखिरी मौका देते हुए 24 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए 11 मार्च तक का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में राज्य में पुल गिरने की घटनाओं की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।
…तो जेब से भरने होंगे 10 हजार रुपए
अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से 10 हजार रुपए का जुर्माना देना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि याचिकाकर्ता को दी जाएगी और इसका भुगतान राज्य के खजाने से नहीं किया जा सकेगा।
याचिका में की गई पुल गिरने की घटनाओं की जांच की मांग
यह जनहित याचिका पंकज कुमार यादव द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें पिछले दस वर्षों में राज्य में पुल गिरने की घटनाओं की जांच कराने की मांग की गई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 27 नवंबर 2025 और 9 जनवरी 2026 को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
24 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा
अब कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए 24 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए 11 मार्च तक का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।




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