झारखंड में 3 साल से जमे कर्मचारियों का होगा तबादला, मंत्री बोले- सरकार आउटसोर्सिंग को खत्म कर रही
झारखंड के मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में कहा कि पलामू समेत सभी जिलों में कार्यरत पदाधिकारी जो एक ही कार्यालय में तीन साल से कार्यरत है, उनका स्थानांतरण होगा। हालांकि इससे पूर्व स्थापना समिति की बैठक आवश्यक है।

झारखंड के मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में कहा कि पलामू समेत सभी जिलों में कार्यरत लिपिक, राजस्वकर्मियों व अन्य पदाधिकारी जो एक ही कार्यालय में तीन साल से कार्यरत है, उनका स्थानांतरण होगा। हालांकि इससे पूर्व स्थापना समिति की बैठक आवश्यक है। भाजपा विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता ने 3 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मियों के स्थानांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चार चार प्रखंड के प्रभार में हैं। आंगनबाड़ी सेविका वर्षों से एक ही जगह कार्यरत है।
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को बजट सत्र के दौरान विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार आउटसोर्सिंग से नियुक्ति प्रक्रिया को धीरे-धीरे समाप्त कर रही है। इसका परिणाम ही है कि विगत कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों में 30 हजार से अधिक पदों पर नियमित नियुक्तियां की गई हैं। इतनी संख्या में नियुक्ति प्रक्रिया विपक्ष ने सत्ता में रहते हुए कभी नहीं की।
मंत्री ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार राज्य में मानव संसाधन को विकसित करने को लेकर काफी गंभीर है। सरकार अपनी आर्थिक संसाधनों के अनुरूप खाली पड़े पदों को भरने का काम कर रही है। सरकार जानती है कि राज्य को आगे ले जाने के लिए मानव संसाधन को विकसित करना नितांत जरूरी है।
संसदीय कार्य मंत्री उक्त जवाब भाजपा विधायक सत्येंद्र तिवारी के द्वारा तारांकित प्रश्न के माध्यम से विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को लेकर पूछे गए सवाल पर दे रहे थे। इस दौरान मंत्री दीपक बिरुआ ने भी कहा कि सरकार लगातार नियुक्तियां कर रही हैं। जैसे-जैसे विभाग की ओर से अधियाचना दी जाएगी, वैसे-वैसे विज्ञापन निकालकर नियुक्तियां की जाएंगी। हालांकि प्रक्रिया में कुछ विलंब हो सकता है, लेकिन यह तय है कि सरकार नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखेगी।
विधायक सत्येंद्र तिवारी ने सदन में कहा कि विभिन्न विभागों में स्वीकृत पद 25 साल पहले के हैं। उसके बाद की अवधि से नया पद स्वीकृत नहीं किया गया। आखिर खाली पदों को लेकर कोई भी विभाग अधियाचना क्यों नहीं भेज रहा है। सरकार को इस पर गंभीर होना चाहिए।
ता से विभागों से पूछना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 3.5 लाख रिक्त पद के विरुद्ध 30,000 पद को भरकर राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। मतलब इन साढ़े छह सालों में मात्र 8 प्रतिशत ही पदों पर नियुक्ति की गई। यानी 25 साल पहले स्वीकृत पदों को भरने में अगले 40 साल और लगेंगे।




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