Death sentence of those accused of killing 4 people in Jharkhand cancelled झारखंड में 4 लोगों की हत्या के आरोपियों की फांसी की सजा रद्द, अदालत ने क्या कहा?, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड में 4 लोगों की हत्या के आरोपियों की फांसी की सजा रद्द, अदालत ने क्या कहा?

झारखंड में कोडरमा के डुमरी गांव में 4 लोगों की हत्या के 2 आरोपियों की फांसी रद्द कर मामले से बरी कर दिया गया। जानिए फांसी की सजा निरस्त करते समय अदालत ने क्या कहा?

Tue, 10 March 2026 01:10 PMRatan Gupta हिन्दुस्तान टीम, रांची
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झारखंड में 4 लोगों की हत्या के आरोपियों की फांसी की सजा रद्द, अदालत ने क्या कहा?

झारखंड में कोडरमा के डुमरी गांव में 4 लोगों की हत्या के 2 आरोपियों की फांसी रद्द कर मामले से बरी कर दिया गया। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं, जिससे संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान पूरे विश्वसनीय नहीं हैं। इसी आधार पर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा निरस्त कर दी।

फांसी की सजा पाए दो सजायाफ्ता संजय यादव एवं रामवृक्ष यादव ने सजा के खिलाफ अपील और राज्य सरकार द्वारा फांसी की सजा को कंफर्म करने पर याचिका दाखिल की थी। 25 सितंबर 2004 की शाम करीब 7:30 बजे जब सेवानिवृत्त शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव घर की छत पर बैठ समाचार सुन रहे थे, तभी 20-25 अपराधियों ने घर पर हमला कर दिया था। इसमें कपिलदेव, उनके पुत्र, पौत्र, रिश्तेदार सकलदेव कुमार की हत्या कर दी गई।

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झारखंड से एक अन्य दिलचस्प खबर भी सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ में कोरोना के दौरान राज्य के कई क्षेत्रों में जंगल की कटाई की जांच के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर दाखिल अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में पीसीसीएफ और डीजीपी को नोटिस जारी किया है।

अदालत ने पूछा है कि क्यों नहीं दोनों के खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाए। अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। इस संबंध में कमलेश सिंह ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता आद्या मिश्रा ने अदालत को बताया कि कोरोना काल में गढ़वा, पलामू, जामताड़ा सहित अन्य जंगलों से पेड़ काट दिए गए।

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इसमें पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत थी। तब कोर्ट की सख्ती पर सरकार ने सीआईडी से जांच कराने का आश्वासन दिया व तत्कालीन सीआइडी डीजी की निगरानी में दो डीएसपी की ओर से जांच कराने की बात कही गई। पर अभी तक कोई जांच नहीं हुई और न ही अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।