जमीन और NOC के फेर में फंसीं झारखंड की 5 बड़ी पानी परियोजनाएं, किनकी क्या स्थिति?
झारखंड के पांच शहरों (आदित्यपुर, रामगढ़, चक्रधरपुर, देवघर और धनबाद) में 1700 करोड़ रुपये की जलापूर्ति परियोजनाएं भूमि विवाद, वन विभाग की मंजूरी और एनओसी न मिलने से अधूरी हैं।

झारखंड के पांच शहरों में करीब 1700 करोड़ की लागत से बन रही पांच शहरी जलापूर्ति योजनाओं के लिए संबंधित जिला प्रशासन को सभी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान कर भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इन परियोजनाओं में आदित्यपुर, रामगढ़, चक्रधरपुर, देवघर और धनबाद फेज-2 शामिल है। बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं में 60 से 76 % तक काम पूरा हो चुका है, लेकिन भूमि विवाद, वन विभाग की मंजूरी और विभिन्न विभागों से एनओसी नहीं मिलने के कारण आगे का काम अटका हुआ है।
किन परियोजनाओं की क्या है स्थिति?
1. आदित्यपुर: इसकी लागत 395.14 करोड़, 76% काम हो चुका है। 489 किमी में 418 किमी में पाइपलाइन बिछ चुकी है। वन भूमि से जुड़े दो प्रस्ताव वन विभाग में लंबित हैं।
2. रामगढ़ : इसकी लागत 537.69 करोड़, सात फीसदी काम हुआ है। भूमि के एनओसी में देरी है काम लटका हुआ है।
3. चक्रधरपुर : लागत 49.29 करोड़, 63 प्रतिशत काम हो चुका है। 63.65 किलोमीटर नेटवर्क, 9,066 घरेलू नल कनेक्शन देना है। पनसुवा बांध में इंटेक वेल निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग की एनओसी लंबित है।
4. देवघर : लागत 272.36 करोड़, 36 प्रतिशत काम हो चुका है। जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण काम प्रभावित है। 21.51 एकड़ भूमि की जरूरत है।
5. धनबाद : लागत 441.52 करोड़, 71 प्रतिशत काम हो चुका है। गोगना और कालिपाडही गांव में सड़क कटिंग की अनुमति लंबित है। भूमि विवाद भी समस्या।
इन पांच परियोजनाओं में पहली दो जलापूर्ति परियोजनाएं केंद्र प्रायोजित अमृत एवं अमृत 2.0 है, जबकि तीन राज्य प्रायोजित है। यह बता दें कि समस्या निपटारे के लिए संबंधित परियोजनाओं के नोडल पदाधिकारियों संग कई बैठकें हो चुकी हैं।
इसी मुद्दे को लेकर छह मई को नगर विकास विभाग और राज्य शहरी विकास प्राधिकरण (सूडा) की समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि आगे की अड़चनें खत्म का भूमि उपलब्ध कराएं।
आदित्यपुर परियोजना वन भूमि मंजूरी के अभाव में रुकी है। रामगढ़ का काम सितंबर तक पूरा होना है। देवघर परियोजना एनओसी के फेर में फंसी है। धनबाद परियोजना पर भूमि विवाद है, चक्रधरपुर नौ साल से लटकी है। नदी क्रॉसिंग और एनएचएआई की मंजूरी नहीं मिलने से पाइप लाइन कार्य बाधित है।




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