जमशेदपुर के 500 बेड वाले MGM अस्पताल में पानी का संकट, बाथरूम का पानी पी रहे मरीज
अस्पताल में भर्ती श्रवण साव शुक्रवार को शौचालय से पीने के लिए पानी भर रहे थे। पूछने पर बताया कि पेयजल की सुविधा नहीं है। ऐसे में बाहर से पानी लाना ही रास्ता है। मरीजों को बाहर जाने नहीं देते, इसलिए बाथरूम के बेसिन से ही पानी लेना पड़ रहा है।

जमशेदपुर में 500 बेड के एमजीएम अस्पताल में मरीजों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं है। स्थिति यह है कि उन्हें बाथरूम का पानी पीना पड़ रहा है या फिर उन्हें अस्पताल भवन से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है। अस्पताल में भर्ती श्रवण साव शुक्रवार को शौचालय से पीने के लिए पानी भर रहे थे। पूछने पर बताया कि पेयजल की सुविधा नहीं है। ऐसे में बाहर से पानी लाना ही रास्ता है। मरीजों को बाहर जाने नहीं देते, इसलिए बाथरूम के बेसिन से ही पानी लेना पड़ रहा है।
बाथरूम के बेसिन से पीने का पानी भर रहे
गदड़ा निवासी लोहा महतो ने कहा कि उनके पिता जी भर्ती है। वे उन्हें छोड़कर नहीं जा सकते, इसलिए बाथरूम के बेसिन से पीने का पानी भर रहे हैं। अस्पताल में पेयजल का इंतजाम नहीं है। इस संबंध में अधीक्षक डॉ. बलराम झा को कई बार फोन किया गया, पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
करोड़ों के अस्पताल में पेयजल का अभाव
पानी लाने जाते हुए परिजन शंकर पातोर ने कहा कि अस्पताल में पानी की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है। सोनारी की सोनिका ने कहा कि मरीज जिनके पास परिजन नहीं हैं, उन्हें काफी परेशानी हो रही है। गरीब मरीजों को भी जेब से पैसे देकर बाहर से बोतल खरीदना पड़ रहा है। करोड़ों का अस्पताल और पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्था भी नहीं है।
पिछले दिनों दो मरीज अस्पताल से गायब हुए थे
एक मरीज ललन कुमार बाहर पानी लाने जा रहा था तो होमगार्ड जवानों ने रोक दिया। कहा कि ऐसे बच्चे गुम भी हो सकते हैं। आखिर उसका कौन जिम्मेवार होगा। वहीं, कोई बुजुर्ग मरीज को बाहर पानी लाने जाने के दौरान कुछ हो गया तो उन्हें कौन देखेगा। पिछले दिनों दो मरीज अस्पताल से गायब हुए थे, जिसमें से एक साकची कोर्ट के पास पड़ा था। वहीं, दूसरा मरीज इमरजेंसी से 14 मार्च की रात बाहर निकलते देखा गया और चार दिन पहले उसका शवर परिसर के झाड़ियों में मिला था। इसके बाद से होमगार्ड जवानों ने भी गश्त बढ़ा दी और मरीजों को बाहर जाने नहीं दे रहे हैं।




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