हेमंत सोरेन सरकार दूसरी बार कर समाधान योजना लाएगी, किसे मिलेगा फायदा
झारखंड सरकार जल्द ही कर समाधान योजना का दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। योजना का प्रारूप (ड्राफ्ट) पहले आम लोगों और व्यापारिक संगठनों के बीच सार्वजनिक किया जाएगा।

झारखंड सरकार जल्द ही कर समाधान योजना का दूसरा चरण शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। योजना का प्रारूप (ड्राफ्ट) पहले आम लोगों और व्यापारिक संगठनों के बीच सार्वजनिक किया जाएगा। उनसे सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएगी। सरकार का उद्देश्य जीएसटी लागू होने से पहले के कर विवादों और न्यायालयों में लंबित मामलों का निपटारा कर बकाया राजस्व की वसूली करना है।
जानकारी के अनुसार दूसरे चरण के माध्यम से राज्य सरकार लगभग 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने और विभिन्न न्यायालयों में लंबित सैकड़ों कर मामलों का समाधान करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत करदाताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, वहीं राज्य सरकार को बकाया कर राशि प्राप्त होगी।
कोर्ट में हजारों मामले हैं लंबित
एक जुलाई 2017 से पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा पूर्व में संचालित कई कर अधिनियम जीएसटी में समाहित हो गए। हालांकि इन पुराने अधिनियमों के तहत कर निर्धारण से जुड़े हजारों मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित रह गए और बड़ी मात्रा में कर राशि बकाया के रूप में फंसी हुई है। इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2022 में झारखंड विधानसभा ने झारखंड कराधान अधिनियमों की बकाया राशि का समाधान विधेयक-2022 पारित किया था। यह कर समाधान योजना का पहला चरण था। उस समय बताया था कि वाणिज्य कर और वैट अवधि से जुड़े 4,000 से अधिक मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं, जिनमें कुछ मामले 40 वर्ष पुराने भी थे।
पहले चरण में करीब 350 करोड़ का मिला था राजस्व
राज्य सरकार के प्रयास से पहले चरण की कर समाधान योजना (सेटलमेंट स्कीम) का बेहतर रिस्पांस मिला था। राज्य सरकार ने मुकदमों को समाप्त कर बकाया राशि की वसूली का प्रावधान किया था, जिससे राज्य को करीब 350 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। योजना के तहत मामलों को विभिन्न श्रेणियों में बांटकर राहत दी गई थी। इसके अनुसार स्वीकृत कर बकाया मामलों में करदाता को मुख्य कर की 100% राशि जमा करनी थी, जबकि बकाया ब्याज और जुर्माने पर 90% तक की छूट दी गई थी। वहीं, वित्तीय वर्ष 2017-18 तक की निर्धारित कर की बकाया राशि में मुख्य कर पर 60% तक की छूट और ब्याज-जुर्माने में 90% तक राहत का प्रावधान था। वित्तीय वर्ष 2017-18 तक की अवधि की सरकारी घोषणापत्र एवं प्रमाणपत्र से जुड़े बकाया मामलों में भी करदाताओं को बड़ी राहत दी गई थी। अन्य विवादित मामलों में केवल 40% कर भुगतान कर विवाद समाप्त करने की सुविधा दी गई थी।




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