एकता की मिसाल बने दीपक का झारखंड में होगा सम्मान, मंत्री इरफान अंसारी अपने वेतन से देंगे 2 लाख रुपए
इरफान अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं पहले भी कह चुका हूं, हमारी लड़ाई किसी हिंदुस्तानी से नहीं है। हमारी लड़ाई उस ब्रिटिश सोच से है, जिसने हमारे पूर्वजों को बेरहमी से कुचला, मारा और गुलामी की जंजीरों में जकड़ दिया।

उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार को धमकाने पहुंचे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से उलझने वाले दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक इन दिनों देश में भाईचारे की मिसाल बने हुए हैं। उनकी तारीफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कर चुके हैं। इसी बीच उनकी तारीफ में झारखंड से भी आवाज उठी है और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने दीपक को इंसानियत, मोहब्बत और एकता की मिसाल बताते हुए उन्हें 2 लाख रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है। सबसे खास बात यह है कि यह राशि उन्होंने सरकारी खजाने से नहीं बल्कि अपने चार महीने के वेतन से देने का ऐलान किया है।
'दीपक के जज्बे और दिलेरी को सलाम'
इस बारे में जानकारी देते हुए इरफान अंसारी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'देश में जब नफरत का जहर फैलाने की लगातार कोशिशें हो रही हैं, ऐसे समय में उत्तराखंड के दीपक ने इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत की जो मिसाल पेश की है, उसने पूरे हिंदुस्तान को सोचने पर मजबूर कर दिया है। दीपक, जिन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ रखा, उनके इस जज़्बे, साहस और दिलेरी को खुले दिल से सलाम।'
अंसारी बोले- हमारी लड़ाई ब्रिटिश सोच से
डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं पहले भी कह चुका हूं, हमारी लड़ाई किसी हिंदुस्तानी से नहीं है। हमारी लड़ाई उस ब्रिटिश सोच से है, जिसने हमारे पूर्वजों को बेरहमी से कुचला, मारा और गुलामी की जंजीरों में जकड़ दिया। दीपक ने आजादी के उसी असली मायने और उस संघर्ष की भावना को आज फिर जिंदा कर दिया है।'
अपने वेतन से देंगे 2 लाख रुपए की राशि
इसके साथ ही डॉ. अंसारी ने ऐलान किया कि वे अपने चार महीनों के वेतन में से 2 लाख रुपए दीपक को देंगे। उन्होंने कहा कि यह राशि भले ही छोटी हो, लेकिन यह दीपक के हौसले को सलाम करने के लिए है और उनके मनोबल को मजबूती देगी। यह एक साफ संदेश है कि हिंदुस्तान की आत्मा नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत है।
दीपक को झारखंड बुलाकर करेंगे सम्मान
मंत्री अंसारी ने यह भी घोषणा की कि वो दीपक को जल्द ही झारखंड बुलाएंगे और खुद अपने हाथों उन्हें सम्मानित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का होगा जो देश को जोड़ती है, तोड़ती नहीं। डॉ. अंसारी ने कहा, 'सच्चे हिंदुस्तानी के खून में नफरत नहीं होती। सच्चा हिंदुस्तानी मोहब्बत करता है, अपनों से मोहब्बत करता है और मोहब्बत का पैगाम फैलाता है।'
'आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देंगे दीपक'
अपनी पोस्ट में आगे उस घटना का ज़िक्र करते हुए डॉ. अंसारी ने कहा कि दीपक ने जिस तरह निर्भीक होकर कहा- 'मैं दीपक हूं, मैं दीपक मोहम्मद हूं' और अकेले दम पर नफरत फैलाने वालों को वहां से खदेड़ दिया। वह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की एक गहरी और ऐतिहासिक लकीर है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
अंसारी बोले- मैं उन्हें दिल से सैल्यूट करता हूं
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, 'जब दीपक खुलेआम कहता है, ‘मैं दीपक मोहम्मद हूं’, तो यही इस देश की असली खूबसूरती सामने आती है और यह नफरत फैलाकर राजनीति की रोटी सेंकने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है।' आगे उन्होंने कहा, 'आज दीपक ने यह साबित कर दिया कि आखिरकार नफरत पर हमेशा मोहब्बत ही जीतती है। आज के दौर में दीपक ने जो साहस और इंसानियत दिखाई है, वह बहादुरी से कम नहीं। मैं उन्हें दिल से सैल्यूट करता हूं।'
अपनी पोस्ट के अंत में इरफान अंसारी ने कहा, 'आज दीपक पूरे देश के लिए एक संदेश हैं- हिंदी हैं हम, हिंदुस्तान हमारा और मोहब्बत हमारी पहचान। मैं दीपक को सैल्यूट करता हूं। जय हिंद।
यह है पूरा मामला, दुकान के नाम को लेकर है विवाद
बता दें कि झारखंड सरकार के मंत्री ने जिस दीपक का सम्मान करते हुए इनाम देने की बात कही है, उनका नाम हाल ही में उस वक्त चर्चा में आया, जब उन्होंने उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार को अपनी दुकान का नाम बदलने के लिए धमका रहे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का निडर होकर सामना किया और इस दौरान अपना नाम दीपक मोहम्मद बताया। दरअसल पिछले काफी समय से कोटद्वार में कपड़ों की एक दुकान के नाम 'बाबा' को लेकर बजरंग दल विरोध कर रहा है और दुकानदार मोहम्मद शोएब पर दुकान का नाम बदलने का दवाब डाला जा रहा है।
'बाबा ड्रेस' दुकान का नाम बदलवाने पहुंचे थे कार्यकर्ता
बजरंग दल के सदस्यों का कहना है कि दुकान के नाम से कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर 'सिद्धबली बाबा' के नाम का भ्रम होता है, इसी वजह से उन्होंने पिछले बुधवार को उस दुकान के बाहर प्रदर्शन किया था। इसी दौरान दुकान मालिक और उसके जिम संचालक दोस्त दीपक कुमार से उनकी तू-तू मैं-मैं हो गई थी। इस दौरान कुमार ने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को वहां से जाने को मजबूर कर दिया।
इसके बाद एक बार फिर शनिवार को बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता उस जिम संचालक दीपक कुमार को सबक सिखाने के इरादे से उसके जिम पर प्रदर्शन करने पहुंच गए थे। इस दौरान इन लोगों ने नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दी थी। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से संघर्ष टल गया था।




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