Cousins death in Jharkhand, SIT formed, police say no external injury marks found on bodies झारखंड में तीन भाई-बहनों के शव मिलने का मामला, PM रिपोर्ट से भी कुछ पता नहीं चला; अब पुलिस ने उठाया यह कदम, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड में तीन भाई-बहनों के शव मिलने का मामला, PM रिपोर्ट से भी कुछ पता नहीं चला; अब पुलिस ने उठाया यह कदम

झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने आरोप लगाया कि जब 23 अप्रैल को शिकायत दर्ज की गई थी, तब पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया था। इस बीच उन्होंने तीनों मृतकों के परिवारों से मुलाकात की और उस जगह का दौरा किया जहां शव मिले थे।

Fri, 1 May 2026 09:36 PMSourabh Jain पीटीआई, हजारीबाग, झारखंड
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झारखंड में तीन भाई-बहनों के शव मिलने का मामला, PM रिपोर्ट से भी कुछ पता नहीं चला; अब पुलिस ने उठाया यह कदम

झारखंड के हजारीबाग जिले के एक जंगल में चार दिन पहले मिले तीन चचेरे भाई-बहनों (दो बहन और एक भाई) के शव मामले में जांच के लिए एक SIT का गठन कर दिया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए हजारीबाग के SP अमन कुमार ने PTI को बताया कि गुरुवार को पुलिस को मिली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में तीनों मृतकों के शवों पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि पुलिस अबतक यह पता नहीं लगा पाई है कि इन तीनों की हत्या की गई थी या उन्होंने आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अभी कुछ और जांचें की जानी बाकी है। SP ने बताया कि इस मामले को लेकर पुलिस ने मोहम्मद आदिल के पिता के बयान के आधार पर सात से आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

मृतकों की पहचान कटकमदाग के रहने वाले मोहम्मद आदिल (25), लोहसिंघा की शनिया परवीन (19) और हजारीबाग मुफस्सिल की खुशी परवीन (21) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि 23 अप्रैल को इन तीनों के लापता होने की शिकायत पुलिस को मिली थी और इसके चार दिन बाद इन तीनों के शव 27 अप्रैल को मुफस्सिल पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत पौटा जंगल इलाके से बरामद किए गए थे।

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इस बारे में आगे बताते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा, 'मैंने तीनों लोगों की मौत की जांच के लिए SDPO मुख्यालय अमित कुमार आनंद के नेतृत्व में एक SIT का गठन किया है।' उन्होंने कहा कि ऑटोप्सी रिपोर्ट में मृतकों के शवों पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं।

SP ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालने के लिए अभी कुछ और टेस्ट किए जाने बाकी हैं कि उनकी हत्या की गई थी या उन्होंने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा, 'डॉक्टरों की सलाह पर, यह पता लगाने के लिए डायटम टेस्ट किए जाएंगे कि क्या वे डूब गए थे।' उन्होंने बताया कि डायटम टेस्ट डूबने के मामलों में इस्तेमाल की जाने वाली एक फोरेंसिक तकनीक है।

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इस बीच, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने आरोप लगाया कि जब 23 अप्रैल को शिकायत दर्ज की गई थी, तब पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया था। इस बीच गुरुवार को उन्होंने तीनों मृतकों के परिवारों से मुलाकात की और उस जगह का दौरा किया जहां शव मिले थे।

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मथारू ने पत्रकारों से कहा, 'मामले के शुरुआती चरण में पुलिस की जांच संतोषजनक नहीं थी। हमने पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक की और उन्हें निर्देश दिया कि वे इस मामले में तेजी से काम करें और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें।' उधर SDPO मुख्यालय ने कहा कि इस मामले में अब तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।