झारखंड में सुनवाई से पहले ही जेल में चल बसा याचिकाकर्ता, HC को पता चला तो ले लिया बड़ा ऐक्शन
झारखंड में रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह में छह केंद्रीय कारागार (जेल) हैं। केंद्रीय कारागार के अलावा पलामू (मेदिनीनगर) और सिमडेगा में स्थित जेल सहित 16 विभिन्न जिला जेल और छह उप-जेल हैं।

झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि जिसके बाद हाई कोर्ट ने पूरे राज्य की जेलों में डॉक्टरों की कमी को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज कर ली और राज्य सरकार से जेलों में खाली पड़े डॉक्टरों के पदों के बारे में सरकार से जवाब तलब किया है। दरअसल जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ जिस आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, उसके बारे में उन्हें सूचित किया गया कि अपीलकर्ता किडनी की समस्याओं से पीड़ित था और जेल में उचित इलाज न मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई है। साथ ही हाई कोर्ट ने इस मामले में मृतक अपीलकर्ता के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें राज्य सरकार से मुआवजा मांगने की अनुमति भी दे दी।
पीठ को बताया गया कि अपीलकर्ता ने इसी वजह से अपनी सजा को निलंबित करने और उसे जेल से रिहा करने की मांग करते हुए यह याचिका लगाई थी, ताकि जेल से बाहर आकर किसी निजी अस्पताल में वह अपना बेहतर इलाज करा सके।
याचिकाकर्ता ने कहा था जेल में इलाज नहीं हो सकेगा
अपीलकर्ता ने याचिका में यह भी बताया था कि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उसके उपचार के लिए पर्याप्त नहीं हैं और उसे निजी अस्पताल में बेहतर इलाज हासिल करने के लिए जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से कार्यवाही को स्थगित करने का अनुरोध किया था।
सरकार का जवाब आने से पहले ही चल बसा याचिकाकर्ता
हालांकि सरकार की तरफ से अपना जवाब दाखिल करने से पहले ही, अदालत को सूचित किया गया कि याचिका दायर करने वाले मरीज की उचित इलाज न मिल पाने के कारण जेल में मौत हो गई है। जिसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और जेलों में डॉक्टरों के खाली पड़े पदों के बारे में सरकार से जवाब तलब किया।
जेलों में डॉक्टरों के स्वीकृत 43 में से 42 पद खाली पड़े
इस दौरान हाई कोर्ट को बताया गया कि राज्य भर की जेलों में डॉक्टरों के 43 स्वीकृत पदों में से 42 पद खाली हैं। साथ ही उसे यह भी बताया कि जेलों में चिकित्सा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की भी भारी कमी है।
पीठ ने मृतक के परिजनों को मुआवजा मांगने की अनुमति दी
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद और जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया और जनहित याचिका दर्ज कर ली। साथ ही इसे आगे सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की पीठ के पास भी भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने उचित इलाज न मिलने के कारण जेल में दम तोड़ने वाले अपीलकर्ता के परिजनों को सरकार से मुआवजे की मांग करने की अनुमति दे दी।
बता दें कि झारखंड में रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह में छह केंद्रीय कारागार (जेल) हैं। केंद्रीय कारागार के अलावा पलामू (मेदिनीनगर) और सिमडेगा में स्थित जेल सहित 16 विभिन्न जिला जेल और छह उप-जेल हैं।




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