झारखंड DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ती को लेकर केंद्र और राज्य आमने-सामने, गृह मंत्रालय ने जताई आपत्ति
झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य की सरकार आमने-सामने है। राज्य सरकार के द्वारा तदाशा मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले डीजीपी नियुक्ति नियमावली में संशोधन कर नियमित डीजीपी बनाया गया था।

राज्य में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य की सरकार आमने-सामने है। राज्य सरकार के द्वारा तदाशा मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले डीजीपी नियुक्ति नियमावली में संशोधन कर नियमित डीजीपी बनाया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस विषय में पहले ही पत्र लिखकर तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्त मानते हुए पत्र राज्य सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव के पत्र का हवाला देते हुए रिमाइंडर भी राज्य सरकार को भेजा गया है। आइए जानते हैं झारखंड और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच किस बात को लेकर विवाद चल रहा है।
UPSC ने भी लिखा पत्र
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के तमिलनाडू के मामले में आदेश के बाद यूपीएससी ने भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर डीजीपी नियुक्ति पैनल के हिसाब से करने के लिए पत्र भेजा था। हालांकि राज्य सरकार ने यूपीएससी पैनल के लिए कोई पत्र नहीं भेजा। ऐसे में यूपीएससी ने इस बावत सुप्रीम कोर्ट को भी जानकारी दी है। जिसके बाद राज्य सरकार के खिलाफ शोकॉज जारी करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को दिया है।
राज्य के समक्ष क्या है चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार के मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप ही डीजीपी नियुक्ति का आदेश फिर से जारी किया है। राज्य सरकार ने अपनी नियमावली बनाकर पहले अनुराग गुप्ता व उनके बाद तदाशा मिश्रा को नियमित डीजीपी बनाया था। अनुराग गुप्ता के डीजीपी की नियुक्ति को भी गृ़ह मंत्रालय ने सही नहीं माना था। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में प्रभारी डीजीपी बनाने या यूपीएससी के पैनल से इतर किसी भी तरह से डीजीपी नियुक्ति को गलत माना है। ऐसे में राज्य सरकार के समक्ष नियमावली को कानूनी रूप से वैध साबित करने की चुनौती होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपीएससी झारखंड व यूपी को शोकॉज करेगा।




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