Pakistan Not Just Broker Betrayer Too, Why Iran Lash Out So Furiously at Friendly Nation? How Donald Trump Hits Jackpot पाकिस्तान दलाल ही नहीं, धोखेबाज भी... दोस्त मुल्क पर इतना क्यों भड़क गया ईरान? ट्रंप मालामाल, International Hindi News - Hindustan
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पाकिस्तान दलाल ही नहीं, धोखेबाज भी... दोस्त मुल्क पर इतना क्यों भड़क गया ईरान? ट्रंप मालामाल

अब पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता पर भी सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच 15-बिंदु शांति प्रस्ताव पहुंचाने का दावा किया है लेकिन ईरान ने इस मध्यस्थता को सार्वजनिक रूप से नकार दिया है।

Fri, 27 March 2026 04:51 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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पाकिस्तान दलाल ही नहीं, धोखेबाज भी... दोस्त मुल्क पर इतना क्यों भड़क गया ईरान? ट्रंप मालामाल

Pakistan not only Broker Betrayer Too: पड़ोसी देश पाकिस्तान दावा करता रहा है कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान-अमेरिका जंग में सीजफायर के लिए मध्यस्थता करा रहा है। एक दिन पहले ही अमेरिकी कैबिनेट में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की कि पाकिस्तान ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है लेकिन अब तेहरान इस्लामाबाद पर भड़क गया है। ईरान ने पाकिस्तान पर धोखा देने के आरोप लगाए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ईरान अब पाकिस्तान की भूमिका को “डबल गेम” के रूप में देख रहा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े नए घटनाक्रम के बाद। इससे ईरान-पाकिस्तान के रिश्तों में दरार के संकेत सामने आ रहे हैं।

दरअसल, यह विवाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल के जहाजों के गुजरने से जुड़ी घटनाओं के बाद उपजा है। ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से भारत समेत अन्य मित्र देशों के तेल-गैस टैंकर लदे जहाजों को गुजरने का इजाजत दी थी। इसी के तहत ईरान ने अपने पुराने दोस्त पाकिस्तान के जहाजों को भी ये सुविधा दी थी लेकिन पाकिस्तान ने ट्रंप के दबाव में आकर 10 अमेरिकी जहाजों पर पाकिस्तानी झंडा लगवाकर उसे होर्मुज स्ट्रेट से पार करवा दिया। इस हरकत से तेहरान इस्लामाबाद पर भड़क उठा है। अब ईरान मध्यस्थ पाकिस्तान की असली वफादारी पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान चापलूसी, चालाकी, दलाली और वफादारी के खेल में फंस गया है। ईरान उसे धोखेबाज करार दे रहा है।

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अमेरिकी खेल में फंस गया पाकिस्तान

दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर दावा किया है कि 10 अमेरिकी जहाज पाकिस्तानी झंडा लाकर होर्मुज़ स्ट्रेट से पार कर गए हैं। अमेरिका जहां इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा है, वहीं ईरान दोस्ती की आड़ में ठगा हुआ और धोखा खाया हुआ महसूस कर रहा है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि जिन पाकिस्तानी जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई थी, उनका इस्तेमाल या समन्वय इस तरह से किया गया था कि अंततः उससे अमेरिका को ही फायदा होना था।

ईरान में गहरी हो रही विश्वासघात की भावना

तेहरान की नजर में, यह एक "रेड लाइन" (सीमा) का उल्लंघन है; जो चीज सद्भावना के तौर पर दी गई थी, उसे अब परोक्ष रूप से एक विरोधी शक्ति की मदद करने वाले कृत्य के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम को कुछ साथी मुस्लिम देशों द्वारा ईरान-विरोधी कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पाकिस्तान के खिलाफ ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के कुछ वर्गों में विश्वासघात की भावना और भी गहरी हो गई है।

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मध्यस्थता-विश्वसनीयता पर भी सवाल

ऐसी स्थिति में अब पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता पर भी सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच 15-बिंदु शांति प्रस्ताव पहुंचाने का दावा किया है लेकिन ईरान ने इस मध्यस्थता को सार्वजनिक रूप से नकार दिया है। अब ईरान इसे तटस्थ प्रयास नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों से जुड़ा कदम बताएगा। विश्लेषकों और सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका के गेम में फंस गया है। वह एक तरफ ईरान से संपर्क बनाए रखना चाहता है तो दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देशों से भी करीबी संबंध बनाए रखना चाहता है लेकिन उसका यह संतुलन अभ्यास एकतरफा झुकाव में बदलता दिख रहा है। इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय साख पर भी बट्टा लग रहा है। ईरान के भीतर यह धारणा तेजी से बन रही है कि पाकिस्तान “संतुलन की राजनीति” नहीं, बल्कि “रणनीतिक लाभ के लिए दोनों पक्षों का उपयोग” कर रहा है। ऐसे में दो दोस्त के बीच तनाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय कूटनीति जटिल हो सकती है।

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