ceasefire between US and Iran will not be easy for Pakistan Muslim nation could emerge as an obstacle पाकिस्तान के लिए आसान नहीं US-ईरान के बीच सीजफायर कराना, यह मुस्लिम देश बन सकता है बाधक, International Hindi News - Hindustan
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पाकिस्तान के लिए आसान नहीं US-ईरान के बीच सीजफायर कराना, यह मुस्लिम देश बन सकता है बाधक

पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और मिस्र भी अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल कूटनीति में सक्रिय रहे हैं, लेकिन हालिया दिनों में संघर्ष तेज होने के कारण इन प्रयासों में और तेजी आई है।

Fri, 27 March 2026 01:00 PMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान के लिए आसान नहीं US-ईरान के बीच सीजफायर कराना, यह मुस्लिम देश बन सकता है बाधक

Iran-US War Updates: मिडिल ईस्ट में ईरान को लेकर बढ़ते संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है। इसे ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश तेज कर दी है। पिछले एक सप्ताह में इस दिशा में पाकिस्तान की कूटनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं, जिससे उसकी वैश्विक भूमिका को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रविवार को सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से संपर्क साधा और इस्लामाबाद को संभावित शांति वार्ता के लिए स्थल के रूप में पेश किया।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से तैयार 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया, हालांकि तेहरान ने इसे खारिज कर दिया। पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और मिस्र भी अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल कूटनीति में सक्रिय रहे हैं, लेकिन हालिया दिनों में संघर्ष तेज होने के कारण इन प्रयासों में और तेजी आई है।

पाकिस्तान के लिए आसान नहीं राह

हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह राह आसान नहीं दिख रही है। यदि ईरान अपने रुख पर कायम रहता है तो स्थिति और जटिल हो सकती है। खासतौर पर सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के रक्षा समझौते के कारण यह संघर्ष सीधे उसके दरवाजे तक पहुंच सकता है। यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल होता है तो उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में बड़ा इजाफा हो सकता है। यह उपलब्धि 1972 के बाद सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी, जब पाकिस्तान ने अमेरिका और चीन के बीच ऐतिहासिक वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी।

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सीजफायर से पाकिस्तान को क्या लाभ

पाकिस्तान को इस संघर्ष के समाप्त होने से सीधे तौर पर लाभ भी होगा। देश में ईरान के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया मुस्लिम आबादी रहती है। फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई, तो पाकिस्तान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा, पाकिस्तान को यह भी डर है कि ईरान में लंबा खिंचने वाला युद्ध उसके सीमावर्ती इलाकों में अस्थिरता फैला सकता है। पाकिस्तान पहले ही अफगान तालिबान से तनाव झेल रहा है और ईरान संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति में भी बाधाएं आई हैं।

मुनीर ने सुधारे अमेरिका से संबंध

पिछले एक साल में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप के साथ करीबी संबंध बनाए हैं, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग भी बढ़ा है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और ईरान के बीच कई संदेशों का आदान-प्रदान करवाया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने इजरायल को ईरान के कुछ शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने से रोकने में भी भूमिका निभाई।

सऊदी बन सकता है बाधक

हालांकि, इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता है। यदि ईरान सऊदी अरब पर हमले जारी रखता है तो पाकिस्तान पर अपने सहयोगी की मदद का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में पाकिस्तान एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह शांति वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह सीधे युद्ध में शामिल होने से बचना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल कितनी सफल होती है और क्या वह इस जटिल संकट में शांति की राह निकाल पाता है।

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