Pakistan Cancels Military Parade Functions Amid Financial Crisis, Austerity Drive पाकिस्तान की कंगाली का फिर फटा पर्दा, खर्च कटौती के बीच रद्द करना पड़ा सैन्य परेड समारोह, International Hindi News - Hindustan
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पाकिस्तान की कंगाली का फिर फटा पर्दा, खर्च कटौती के बीच रद्द करना पड़ा सैन्य परेड समारोह

शहबाज शरीफ सरकार ने कहा है कि खाड़ी तेल संकट और सरकार द्वारा घोषित खर्च में कटौती के उपायों को देखते हुए, यह फ़ैसला किया गया है कि 23 मार्च को पाकिस्तान डे परेड और उससे जुड़े औपचारिक कार्यक्रम नहीं होंगे।

Tue, 17 March 2026 10:13 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान की कंगाली का फिर फटा पर्दा, खर्च कटौती के बीच रद्द करना पड़ा सैन्य परेड समारोह

पड़ोसी देश पाकिस्तान की कंगाली एक बार फिर जगजाहिर हुई है। ईरान जंग के बीच गहराते आर्थिक संकट और बढ़ती मितव्ययिता (austerity) के बीच पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने 23 मार्च को होने वाले ‘पाकिस्तान डे’ के भव्य सैन्य परेड समारोह को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस बार कार्यक्रम सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किए जाएंगे। सरकार ने कहा, "खाड़ी तेल संकट और सरकार द्वारा घोषित खर्च में कटौती के उपायों को देखते हुए, यह फ़ैसला किया गया है कि 23 मार्च को पाकिस्तान डे परेड और उससे जुड़े औपचारिक कार्यक्रम नहीं होंगे।"

सादगी से मनाया जाएगा राष्ट्रीय दिवस

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तेल संकट और उसके आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अब ‘पाकिस्तान डे’ को केवल ध्वजारोहण समारोह के साथ “गरिमा और सम्मान” के साथ मनाया जाएगा। सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे इस दिन को सादगी और गंभीरता से मनाएं। सरकार ने कहा, “यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है कि पाकिस्तान डे के आदर्शों के प्रति राष्ट्र का लचीलापन और अटूट समर्पण, खर्च में कटौती के व्यापक ढांचे के अनुरूप बना रहे।”

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आर्थिक दबाव का संकेत

भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस तरह के प्रमुख सैन्य समारोह को रद्द करना गंभीर वित्तीय संकट का स्पष्ट संकेत है। उनका मानना है कि इससे यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी दबाव में है कि वह अपने प्रतिष्ठित आयोजनों पर खर्च करने में भी असमर्थ हो रहा है। सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान सेना की अनुमानित ताकत और उसकी सीमित आर्थिक क्षमता के बीच एक गंभीर खाई पैदा हो गई है।

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मितव्ययिता के सख्त कदम

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने हाल ही में कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के वेतन में 5% से 30% तक कटौती, सरकारी वाहनों का 60% तक उपयोग बंद करना, मंत्रियों और अधिकारियों की विदेशी यात्राओं पर प्रतिबंध (आवश्यक यात्राओं को छोड़कर) शामिल हैं। इन कदमों का उद्देश्य बढ़ते वित्तीय दबाव को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ कम करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईंधन आपूर्ति बाधित होने के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे आयात पर निर्भर देशों, खासकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस संकट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कुछ पुरानी कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है, जैसे- आयात पर अत्यधिक निर्भरता, कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ता कर्ज। बहरहाल, ‘पाकिस्तान डे’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन का रद्द होना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का संकेतक माना जा रहा है

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