अफगान-पाकिस्तान युद्ध का भारत पर कितना असर? क्या आने वाले समय में बढ़ेंगी मुश्किलें
दक्षिण एशिया इन दिनों युद्ध की मार से जूझ रहा है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोल रखा है। वहीं, इधर अफगानिस्तान और पाकिस्तान का भी युद्ध भी चल रहा है। फरवरी के अंत से ही दोनों देशों के बीच ठनी हुई है।

दक्षिण एशिया इन दिनों युद्ध की मार से जूझ रहा है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोल रखा है। वहीं, इधर अफगानिस्तान और पाकिस्तान का भी युद्ध भी चल रहा है। फरवरी के अंत से ही दोनों देशों के बीच ठनी हुई है। पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। इन सबके बीच भारत भी डूरंड लाइन पर नजरें जमाए हुए हैं। भारत के लिए, यह सिर्फ दो देशों के बीच की झड़प नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो सीधे इसकी पश्चिमी सीमा, ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई को प्रभावित करती है।
भारत के लिए रणनीतिक अवसर
गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की लंबे समय तक दोस्ती रही है। वह अफगानिस्तान में अपने रणनीतिक साझीदार को देखता रहा है। लेकिन हालात उसके हिसाब रहे नहीं हैं। पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका तालिबान से लगा है। तालिबान, कभी इस्लामाबाद का प्रॉक्सी माना जाता था। लेकिन जब से तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता संभाली है, वह डूरंड रेखा को मान्यता देने से इनकार करता है। पाकिस्तान-तालिबान के बीच की इस लड़ाई ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर पैदा किया है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर हवाई हमलों की निंदा की है। साथ ही, भारत ने खुद को अफगानी संप्रभुता के रक्षक के रूप में स्थापित किया है।
भारत के लिए कैसे अहम
मौजूदा युद्ध के केंद्र में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) है। यह एक उग्रवादी समूह है। पाकिस्तान, आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान टीटीपी को आश्रय देता है। वहीं, भारत के लिए भी टीटीपी का उभार भी एक दोधारी तलवार है। भारत की पहली चिंता यह है कि वह सीमा पर आईएसआईएस-के या अल-कायदा को फिर से उभरने न दे। वहीं, भारत अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत बनाए रखना चाहेगा। इस दिशा में नई दिल्ली की तरफ से प्रयास भी हो रहा है। 2026-27 के बजट में मानवीय सहायता को 150 करोड़ रुपए तक बढ़ाकर भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि अफगानिस्तान मजबूत बना रहे। ताकि कोई आतंकी समूह अफगानिस्तान की धरती से भारत को निशाना न बना पाए।
पाकिस्तान के दावे पर क्या बोला अफगानिस्तान
इस बीच पाकिस्तान ने रात भर हवाई हमले कर पूरे अफगानिस्तान में आतंकवादियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि अफगान सरकार ने इस्लामाबाद पर काबुल में एक पुनर्वास अस्पताल पर बमबारी करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, ये ताजा हमले 26 फरवरी को शुरू किए गए ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’ के जारी रहने के दौरान हुए हैं। पाकिस्तान ने 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर अफगान तालिबान बलों द्वारा कथित हमलों के जवाब में यह ऑपरेशन शुरू किया था।
‘टोलोन्यूज’ ने अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों का हवाला देते हुए मंगलवार को बताया कि बचाव अभियान जारी रहने के दौरान मलबे के नीचे अब भी 50 से अधिक शव फंसे होने की आशंका है। हालांकि, तरार ने दावा किया कि पाकिस्तान ने काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान तथा फ़ितना अल-ख्वारिज के अड्डों और आतंकवदियों के ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया। इन ठिकानों में तकनीकी उपकरण भंडारण और गोला-बारूद भंडारण शामिल थे जिनका उपयोग पाकिस्तान के निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।




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