Muslim Nations Preparing to Respond to Iran Gathering in Saudi Arabia ईरान को जवाब देने की तैयारी में मुस्लिम देश? सऊदी अरब में जमावड़ा; कौन-कौन हो रहा शामिल, International Hindi News - Hindustan
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ईरान को जवाब देने की तैयारी में मुस्लिम देश? सऊदी अरब में जमावड़ा; कौन-कौन हो रहा शामिल

अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच खाड़ी देश सऊदी अरब में बैठक कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में ईरान द्वारा किए गए हमलों पर प्रतिक्रिया देने की योजना बनाई जाएगी। अमेरिका से युद्ध के दौरान ईरान ने खाड़ी देशों में हमले किए थे। 

Tue, 28 April 2026 05:29 PMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान को जवाब देने की तैयारी में मुस्लिम देश? सऊदी अरब में जमावड़ा; कौन-कौन हो रहा शामिल

ईरान और अमेरिका में जारी तनाव के बीच खाड़ी देशों के नेता सऊदी अरब में महाबैठक कर रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को जेद्दाह में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के नेता मिल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुए आज दो महीने बीत गए हैं। इस बीच यह पहली बैठक है जब खाड़ी देशों के नेता एक जगह पर इकट्ठा होरहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि यह बैठक ईरान को जवाब देने के लिए बुलाई गई है। अमेरिका के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने कतर और यूएई समेत पड़ोसी देशों पर भी मिसाइल हमले किए थे। ऐसे में ये सारे मुस्लिम देश ईरान को प्रतिक्रिया देने पर विचार कर रहे हैं।

बता दें कि जीसीसी में 6 देश हैं। ईरान की तरफ से किए गए मिसाइल हमलों में इन देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। 8 अप्रैल और ईरान और अमेरिका बीच अस्थायी युद्धविराम होगया है। अमेरिका और ईरान ने एक बार पाकिस्तान में स्थायी युद्धविराम के लिए वार्ती भी की लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया।

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खाड़ी देशों की न्यूज एजेंसियों के मुताबिक इस बैठक में कतर के अमीर, कुवैत के क्राउन प्रिंस और बहरीन के किंग शामिल हो रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ओणान, यूएई भी इसमें हिस्सा लेगा या नहीं। सऊदी अरब खुद इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। जानकारों का कहना है कि जीसीसी का प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं है। खाड़ी के अमीर मुस्लिम देशों का यह संगठन अब तक कोई बड़ा फैसला नहीं कर पाया है।

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होर्मुज के पास फंसे हैं 20 हजार से ज्यादा नाविक

बता दें कि ईरान और अमेरिका में तनाव कम ना होने की वजह से होर्मुज भी बंद है और इस वजह से सैकड़ों जहाजों पर हजारों नाविक भी फंसे हुए हैं। इसके अलावा दुनिया के ज्यादातर देश फ्यूल की कमी से जूझने लगे हैं। दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। समुद्र संबंधी डेटा देने कंपनी 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' के अनुसार, 13 से 19 अप्रैल के दौरान इस जलडमरूमध्य से लगभग 80 जहाज गुजरे। युद्ध से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 130 या उससे अधिक जहाज गुजरते थे।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक दर्जनों जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 10 नाविकों की मौत हो चुकी है। पिछले हफ़्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। इसके बावजूद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखी। जवाब में, ईरान ने स्ट्रेट में जहाज़ों पर गोलीबारी की और दो जहाज़ों पर कब्ज़ा कर लिया।

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वहीं, 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में सैन्य खर्च 2025 में स्थिर हो गया जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में यह बढ़ गया। इसके अनुसार, पूरे क्षेत्र के सैन्य खर्च में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है लेकिन इजरायल और ईरान दोनों के खर्च में वास्तव में गिरावट आई है।

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