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भारत-पाक जंग में प्लेन गिनाने वाले ट्रंप खुद पर क्यों चुप? ईरान ने तो सच में US की लंका लगा दी!

भारत-पाक के 'ऑपरेशन सिंदूर' में खुद को हीरो बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप ईरान के पलटवार पर चुप क्यों हैं? अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की तबाही और पेंटागन के 200 अरब डॉलर मांगने की इनसाइड स्टोरी पढ़ें।

Tue, 28 April 2026 11:44 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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भारत-पाक जंग में प्लेन गिनाने वाले ट्रंप खुद पर क्यों चुप? ईरान ने तो सच में US की लंका लगा दी!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले साल मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर बार-बार क्रेडिट लेते रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने टैरिफ को बतौर हथियार इस्तेमाल कर युद्धविराम कराया, न्यूक्लियर वॉर रोकी और लाखों जिंदगियां बचाईं। साथ ही, उन्होंने बार-बार अलग-अलग आंकड़ों में 'महंगे प्लेन' गिराए जाने का जिक्र किया। शुरू में 5, फिर 7, 8, 10 और अब 11 विमानों के तबाह होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन अब जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर भारी नुकसान पहुंचाया है, तो ट्रंप इस पर खामोश नजर आ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि ईरान के हमलों से अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भारी तबाही हुई है। यह नुकसान जितना पब्लिक में बताया गया है उससे कहीं ज्यादा है और रिपेयरिंग में अरबों डॉलर खर्च होंगे।

अमेरिकी मीडिया में आई हालिया रिपोर्ट्स ने इस बात की पोल खोल दी है कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका को उम्मीद से कहीं ज्यादा भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालत यह है कि अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हथियारों के खाली होते भंडार को भरने के लिए 200 अरब डॉलर के इमरजेंसी फंड की मांग कर डाली है।

ईरान ने मचाई भारी तबाही (क्या-क्या हुआ नष्ट?)

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका के 11 सैन्य ठिकानों के 100 से अधिक लक्ष्यों पर सटीक और भीषण हमले किए हैं। इस तबाही का स्तर इतना बड़ा है कि कुछ बेस अब रहने या इस्तेमाल करने लायक नहीं बचे हैं। बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के बेहद महत्वपूर्ण 'पांचवें बेड़े' के मुख्यालय को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कतर के मशहूर अल-उदीद एयरबेस का रनवे तबाह हो गया है। इसके अलावा इराक (इरबिल) के हथियार डिपो और कुवैत (अली अल सलेम एयरबेस) के हैंगर नष्ट हो गए हैं। यूएई और सऊदी अरब के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।

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ईरान ने सच में लगा दी 'लंका'

अमेरिकी मीडिया और रक्षा सूत्रों के हवाले से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे वाइट हाउस की नींद उड़ाने वाली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जो जवाबी हमले किए हैं, वे शुरुआत में बताए गए नुकसान से कहीं ज्यादा विनाशकारी हैं। ईरान ने इराक और सीरिया में भी मौजूद कई अमेरिकी बेसों को निशाना बनाया है। इन हमलों से निपटने के लिए अमेरिका को अपने महंगे एयर डिफेंस सिस्टम का बेतहाशा इस्तेमाल करना पड़ा। इन हमलों में अमेरिका के करोड़ों डॉलर के कई MQ-9 रीपर ड्रोन, कम से कम एक फाइटर जेट और 100-100 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत वाले दो MC-130 टैंकर विमान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।

युद्ध की बढ़ती लागत और खत्म होते हथियारों को देखते हुए पेंटागन ने सीधे 200 बिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि मांगी है। यह रकम इस बात का सबूत है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य बजट की जड़ें हिला दी हैं। एक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की कीमत ही लगभग 35 लाख डॉलर होती है। ईरान पर दागी गई हजारों मिसाइलों ने पहले ही हफ्ते में अमेरिका के 11.3 बिलियन डॉलर फूंक दिए थे। ट्रंप प्रशासन ने संसद और जनता के सामने नुकसान को कम करके बताया। ट्रंप ने ईरान के तबाह होने का दावा किया है, लेकिन US बेस के नुकसान पर चुप्पी साध रखी है।

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'ऑपरेशन सिंदूर' में क्यों उछल रहे थे ट्रंप?

ईरानी हमलों से हुए नुकसान पर अमेरिका की इस 'चुप्पी' और 'मजबूरी' को पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल मई 2025 में जब भारत ने पाकिस्तान पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत एयरस्ट्राइक की थी और दोनों देशों के बीच बड़ा हवाई युद्ध हुआ था, तब ट्रंप का रवैया बिल्कुल अलग था। 10 मई को हुए युद्धविराम के बाद ट्रंप ने रैलियों में इसका पूरा श्रेय खुद लिया था। अपनी 'स्ट्रॉन्ग मैन' वाली छवि को भुनाने के लिए उन्होंने कई बार झूठे और बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए। कभी उन्होंने कहा कि आसमान से कई 'आलीशान प्लेन' मार गिराए गए, तो कभी इन विमानों की संख्या अपने हिसाब से बदल दी। उस वक्त उनके लिए यह किसी नुकसान का सौदा नहीं था, बल्कि मुफ्त की पब्लिसिटी थी।

अब क्यों बंद है बोलती?

रिपोर्ट बताती है कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) जानबूझकर नुकसान के असल आंकड़े और मरम्मत का खर्च अमेरिकी सांसदों को नहीं बता रहा है। सांसदों का कहना है कि किसी को कुछ नहीं पता, और ऐसा नहीं है कि हम पूछ नहीं रहे। अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने के असल आंकड़ों को भी कथित तौर पर छिपाया या बदला जा रहा है। जैसे हाल ही में बिना कोई कारण बताए हताहतों की संख्या 428 से घटाकर 413 कर दी गई।

इस भारी नुकसान और कूटनीतिक विफलता के कारण ग्लोबल लेवल पर भी अमेरिका का मजाक बन रहा है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने एक कार्यक्रम में खुलेआम कहा कि ईरानी नेतृत्व द्वारा अमेरिका को अपमानित किया जा रहा है। उनका कहना था कि ईरान बहुत ही चालाकी से बिना किसी नतीजे के अमेरिकियों को खाली हाथ लौटा रहा है और अमेरिका की पूरी दुनिया के सामने फजीहत हो रही है।

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