होर्मुज समुद्री मार्ग खोलने की आखिरी उम्मीद भी ढही; UNSC में रूस-चीन ने लगा दिया अड़ंगा, US संग खेला
दरअसल, रूस और चीन ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिसकी वजह से प्रस्ताव UNSC में गिर गया। यह अहम घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को तबाह करने की धमकी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।

पिछले करीब डेढ़ महीने से ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज समुद्री मार्ग बंद है। इसे खुलवाने के लिए बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में प्रस्ताव लाया था लेकिन रूस और चीन की वजह से यह प्रस्ताव गिर गया है। इस तरह व्यापारिक नजरिए से काफी अहम होर्मुज समुद्री मार्ग को खुलवाने का आखिरी रास्ता भी बंद हो गया। दरअसल, रूस और चीन ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिसकी वजह से प्रस्ताव UNSC में गिर गया। यह अहम घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को तबाह करने की धमकी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।
इस बीच, खबर आई है कि UAE ने बहरीन का समर्थन करते हुए सुरक्षा परिषद से आग्रह किया था कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट को खुलवाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करे। UAE के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ़ बिन राशिद अल-ज़यानी ने ज़ोर देकर कहा कि अब यह सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए एक सीधा खतरा है।
प्रस्ताव में बार-बार किया गया संशोधन
बहरीन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में बार-बार संशोधन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि ये दोनों (रूस-चीन) देश इसपर मतदान से दूर रहेंगे। पंद्रह सदस्यीय UNSC में प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट जबकि विरोध में दो वोट पड़े। वहीं, दो सदस्यों ने मतदान से दूरी बना ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को रणनीतिक महत्व वाले जलमार्ग खोलने या अपने बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमलों का सामना करने के लिए निर्धारित की गई समय सीमा से कुछ घंटे पहले यह मतदान हुआ। बता दें कि विश्व के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन आमतौर पर इसी जलमार्ग से होता है और युद्ध के दौरान इस मार्ग पर ईरान की मजबूत पकड़ के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू गई हैं।
प्रस्ताव को काफी कमजोर कर दिया गया था
हालांकि, यह संदेहजनक है कि यदि यह प्रस्ताव पारित भी हो जाता, तो भी पांचवें सप्ताह में पहुंच चुके इस युद्ध पर इसका कोई प्रभाव पड़ता, क्योंकि रूस और चीन को 'वीटो' करने से रोकने के लिए उन्हें मतदान से दूर रखने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को काफी कमजोर कर दिया गया था।बहरीन के प्रारंभिक प्रस्ताव में, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को होर्मुज स्ट्रेट से पारगमन सुनिश्चित करने और इसे बंद करने के प्रयासों को रोकने के लिए ''सभी आवश्यक साधनों'' (संयुक्त राष्ट्र की शब्दावली में सैन्य कार्रवाई भी शामिल) का उपयोग करने का अधिकार दिया गया था।
तीन देशों ने बल प्रयोग को मंजूरी देने का किया विरोध
पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 'वीटो' शक्ति रखने वाले पांच देशों में शामिल रूस, चीन और फ्रांस ने बल प्रयोग को मंजूरी देने का विरोध किया था, जिसके बाद प्रस्ताव में संशोधन किया गया और उसमें आक्रामक कार्रवाई से संबंधित सभी संदर्भ हटा दिए गए। इसमें केवल ''सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों'' को ही अधिकृत किया गया था। इसके बजाय प्रस्ताव को और कमजोर कर दिया गया, ताकि सुरक्षा परिषद की मंजूरी (जो कि कार्रवाई का आदेश होता है) का कोई भी जिक्र न रहे और इसके प्रावधान केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित कर दिए जाएं। पिछले मसौदों में आसपास के जलक्षेत्रों को भी शामिल किया गया था।
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