अमेरिका पर हो सकता है 9/11 जैसा एक और हमला; युद्ध के बीच ईरान का बड़ा दावा
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के प्रमुख सलाहकार अली लारजिनी ने दावा किया है कि एपस्टीन के बाकी दोस्त अमेरिका के ऊपर 9/11 जैसा एक और हमला करके इसका आरोप ईरान पर लगा सकते हैं। लारजिनी ने कहा की ईरान ऐसे किसी भी षड्यंत्र का विरोध करता है।
पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच ईरान की तरफ से बड़ा दावा किया गया है। तेहरान की तरफ से कहा गया है कि ऐसा सुनने में आया है कि एपस्टीन के दोस्त मिलकर अमेरिका में एक 9/11 जैसा हमला करवा सकते हैं। इस हमले के बाद इसका आरोप ईरान पर मढ़ा जा सकता है। गौरतलब है कि ईरान की तरफ से यह दावा ऐसे समय पर किया जा रहा है, जब अमेरिका और इजरायल की सेना लगातार उसके ऊपर बम बरसा रही है। पलटवार करते हुए ईरान भी लगातार खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। एक हफ्ते में जंग जीतने का सपना लेकर आए अमेरिका के लिए यह एक लंबा युद्ध साबित हो रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका कोई बड़ा हमला कर सकता है।
इन पूरे हालातों पर ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के प्रमुख सलाहकार अली लारिजानी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि एपस्टीन के नेटवर्क के बचे हुए सदस्यों ने 9/11 जैसी घटना कराने की योजना बनाई है। इस हमले के बाद इसका आरोप ईरान पर डालने की योजना है। ईरान मूल रू से ऐसे किसी भी आतंकवादी षडयंत्रों का विरोध करता है और उसका अमेरिका जनता से कोई युद्ध नहीं है।
गौरलतब है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही लारजिनी लगातार अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के ऊपर हमला बोलते रहे हैं। ट्रंप को एपस्टीन का खास दोस्त बताने वाले लारजिनी ने कुद्स परेड के दौरान अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि ईरान के नेता जनता के बीच रहते हैं, लेकिन अमेरिका के नेता एपस्टीन आइलेंड पर रहते हैं। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप का नाम अमेरिका के बदनाम फाइनेंशर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में कई बार सामने आया है, जिसके बाद उनके ऊपर कई तरह के आरोप लग रहे हैं। ट्रंप के विरोधी कई लोगों का मानना है कि ट्रंप ने एपस्टीन फाइल्स से जनता का ध्यान हटाने के लिए वेनेजुएला और ईरान पर हमला करने की रणनीति अपनाई है।
हालांकि, ट्रंप कई बार इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि उनका और एपस्टीन का कोई खास रिश्ता नहीं था और न ही कभी वह एपस्टीन आइलैंड पर गए हैं। ट्रंप विरोधी लगातार ट्रंप की इस बात को खारिज करते हुए उन्हें एपस्टीन का करीबी बताते रहे हैं। बता दें, एपस्टीन के ऊपर कई बड़े लोगों के साथ मिलकर नाबालिग लड़के-लड़कियों के साथ यौन हिंसा, मारपीट, फाइनेंशिंग, किडनैपिंग जैसे कई गंभीर आरोप लगे हैं। एपस्टीन की मौत हो चुकी है, लेकिन अमेरिकी खुफिया विभाग ने उसके काले-कारनामों की जांच की थी। अब धीरे-धीरे उस जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा रहा है, जिसमें वैश्विक स्तर के कई बड़े नाम सामने आए हैं। इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स, ब्रिटेन के राजा के सगे भाई प्रिंस एंड्रयू जैसे नाम शामिल हैं।
दूसरी तरफ, लारजिनी की बात करें तो ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अपनी मृत्य के ठीक पहले उन्हें सैन्य और प्रशासनिक तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दी थी। ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ हुए विद्रोह को दबाने में भी लारजिनी की अहम भूमिका रही है। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से ही वह लगातार अमेरिका और इजरायल पर हमला बोलते रहे हैं।
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