ईरान बातचीत के मूड में नहीं है, अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया
युद्ध की शुरुआत में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया। ट्रंप ने इसे शासन परिवर्तन करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान संग अलग लोगों से सौदा किया जा रहा है।
ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इसे अवास्तविक और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव ज्यादातर एकतरफा है। युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुए इस संघर्ष में ईरान के कई शीर्ष नेता मारे गए हैं। ईरान ने ताजा प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए प्राप्त होने की बात कही, लेकिन सीधी बातचीत से इनकार कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि ईरान ने प्रस्ताव के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति जताई है। उन्होंने पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के जरिए बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, 'वे हमें अधिकांश नंबर दे चुके हैं। वे ऐसा क्यों नहीं करेंगे?' उन्होंने आगे कहा कि कुछ और मुद्दों पर भी चर्चा जारी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी भी दी, जिस पर ईरान का ऑयल टर्मिनल स्थित है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी डिफेंस कमजोर है और अमेरिका इसे आसानी से ले सकता है।
सीधी बातचीत को तैयार नहीं ईरान
युद्ध की शुरुआत में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया। ट्रंप ने इसे शासन परिवर्तन करार दिया। उन्होंने कहा कि अब ईरान के साथ अलग लोगों से सौदा किया जा रहा है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। करीब 20 प्रतिशत विश्व तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरती है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने आश्वासन दिया कि जल्द ही राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईरान ने सम्मान के प्रतीक के रूप में 20 बड़े तेल टैंकर होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है, जो अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएंगे। दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन गतिरोध बना हुआ है। ईरान सीधी बातचीत से इनकार कर रहा है, जबकि अमेरिका सौदे की उम्मीद जता रहा है। इस संघर्ष से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
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