Major Changes in Nepal PM Balendra Balen Shah Rapid Decisions what is Signal for India नेपाल में PM बदलते ही बड़े बदलाव, ताबड़तोड़ फैसले ले रहे बालेन शाह; भारत के लिए क्या संकेत?, International Hindi News - Hindustan
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नेपाल में PM बदलते ही बड़े बदलाव, ताबड़तोड़ फैसले ले रहे बालेन शाह; भारत के लिए क्या संकेत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बालेंद्र शाह को बधाई देते हुए कहा कि वह दोनों देशों के हित के लिए भारत और नेपाल के संबंधों को और गहरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्साहित हैं।

Mon, 30 March 2026 03:09 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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नेपाल में PM बदलते ही बड़े बदलाव, ताबड़तोड़ फैसले ले रहे बालेन शाह; भारत के लिए क्या संकेत?

Balen Shah: नेपाल में पिछले साल हुए हिंसक जेन-Z विरोध प्रदर्शनों के बाद देश के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र 'बालेन' शाह ने पद संभाल लिया है। अब पीएम बनते ही बालेन शाह ने एक के बाद एक ताबड़तोड़ सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। शपथ लेने के 48 घंटे के भीतर ही उन्होंने 100 पॉइंट का एक्शन प्लान जारी किया है, जिसका मकसद सरकारी सिस्टम में बड़ा बदलाव लाना है। सबसे ज्यादा चर्चा में उनका छात्र राजनीति पर पूरी तरह बैन लगाने का फैसला है।

इससे पहले 35 साल की उम्र में शाह दुनिया के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में एक बन गए हैं। उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 5 मार्च को हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। अब उनके सामने उन युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है, जिन्होंने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया। सरकार ने अपने सबसे पहले फैसलों में इस आंदोलन में मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान भी किया है।

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विरोधियों पर शिकंजा

बालेन शाह की सरकार ने सत्ता में आते ही राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई शुरू की है। पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर पिछले साल हुए जन आंदोलन को दबाने का आरोप है, जिसमें 77 लोगों की मौत हुई थी। वहीं पूर्व मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा विधायक रेखा शर्मा को एक शोषण के आरोप में हिरासत में ले लिया गया है।

राजनीति को लेकर बड़े फैसले

सरकार के पहले फैसलों में कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस से छात्र राजनीति खत्म करने का आदेश शामिल है। इसके बदले 90 दिनों के भीतर गैर-राजनीतिक छात्र संगठन जैसे “स्टूडेंट काउंसिल” बनाए जाएंगे। शाह का कहना है कि कैंपस में राजनीति के कारण हिंसा, तोड़फोड़ और पढ़ाई में बाधा आती है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक भागीदारी कमजोर होगी और नए नेताओं के लिए मंच खत्म हो जाएगा।

अफसर भी राजनीति से दूर

सरकार ने ब्यूरोक्रेसी को भी राजनीति से दूर करने के कदम उठाए हैं। सरकारी कर्मचारी और शिक्षक अब किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं रह सकेंगे और सरकारी संस्थानों में काम करने वाले ट्रेड यूनियन खत्म किए जाएंगे। समर्थकों का मानना है कि इससे कामकाज बेहतर होगा, जबकि विरोधियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे।

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शिक्षा क्षेत्र में भी बदलाव

शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ग्रेजुएशन में एडमिशन के लिए नागरिकता की शर्त हटाई जाएगी और परीक्षा रिजल्ट तय समय पर घोषित करना अनिवार्य होगा। कक्षा 5 तक इंटरनल एग्जाम खत्म किए जाएंगे और उनकी जगह नए मूल्यांकन सिस्टम लाए जाएंगे। साथ ही ऑक्सफोर्ड, पेंटागन, सेंट जोसेफ और सेंट जेवियर्स जैसे विदेशी नाम रखने वाले संस्थानों को अपने नाम बदलने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत पर क्या कहा?

विदेश नीति के मोर्चे पर शाह ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर संकेत दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। पीएम मोदी के बधाई संदेश के जवाब में नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं हमारे दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने और हमारी जनता की साझा समृद्धि के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।”

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गौरतलब है कि क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि से नेपाल, भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण देश माना जाता है, और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को इस परिप्रेक्ष्य में खास अहमियत दी जाती है। वहीं नेपाल माल और सेवाओं के परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर है। चारों तरफ से जमीन से घिरे होने के कारण समुद्र तक उसकी पहुंच भारत के रास्ते ही संभव है, और वह अपनी अधिकांश जरूरतों का आयात भी भारत से या भारत के माध्यम से ही करता है।

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