Iran names Khamenei son Ayatollah Mojtaba Khamenei to succeed him, signaling no letup in war as oil prices surge भड़केगी जंग या सुलह की गुंजाइश; मोजतबा को ईरान की कमान के क्या मायने? तेल के दाम पर क्या असर, International Hindi News - Hindustan
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भड़केगी जंग या सुलह की गुंजाइश; मोजतबा को ईरान की कमान के क्या मायने? तेल के दाम पर क्या असर

मोजतबा के नए सर्वोच्च नेता बनने की घोषणा होते ही वैश्विक बाजारों में भारी हलचल देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय मानक तेल Brent Crude की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के समय से लगभग 65% अधिक है।

Mon, 9 March 2026 06:05 PMPramod Praveen एपी, दुबई/तेहरान
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भड़केगी जंग या सुलह की गुंजाइश; मोजतबा को ईरान की कमान के क्या मायने? तेल के दाम पर क्या असर

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम कमांडर दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह उनके बेटे और कट्टरपंथी अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को नए सर्वोच्च नेता के तौर पर चुना है। देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था Assembly of Experts ने मोजतबा खामेनेई के चयन की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध लगातार तेज हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम लीडर के पद पर मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति से इस बात के संकेत मिलते हैं कि आगे आने वाले समय में तेहरान युद्ध से पीछे हटने के बजाय और आक्रामक रुख अपना सकता है। यानी ईरान जंग और गहरा सकता है, जिसका पूरी दुनिया पर असर पड़ने वाला है।

युद्ध की शुरुआत में मारे गए थे अली खामेनेई

ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की युद्ध के शुरुआती हमलों में ही मौत हो गई थी। इसके बाद देश की सत्ता व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च पद सौंप दिया गया। मोजतबा खामेनेई को ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का करीबी माना जाता है, जो इस समय इजरायल और मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।

तेल बाजार में भारी उछाल

मोजतबा के नए सर्वोच्च नेता बनने की घोषणा होते ही वैश्विक बाजारों में भारी हलचल देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय मानक तेल Brent Crude की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के समय से लगभग 65% अधिक है। इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल टैंकरों की आवाजाही होती है। ईरान के हमलों के कारण कई तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है।

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खाड़ी देशों में भी हमले

युद्ध का असर पूरे मध्य-पूर्व में फैल गया है। मोजतबा के आते ही ईरान ने कई देशों में ऊर्जा और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक तेल सुविधा पर हमला शामिल है, जिसमें दो लोग घायल हो चुके हैं। इसके अलावा बहरीन की एकमात्र तेल रिफाइनरी को भी ईरानी हमले में नुकसान पहुंचा है। सऊदी अरब के के शायबह तेल क्षेत्र पर भी ड्रोन हमले किए गए, जिसे रोक लिया गया। क्षेत्र में कुवैत, कतर और बहरीन में भी मिसाइल हमले किए गए हैं।

इजरायल और लेबनान में भी लड़ाई

मिडिल-ईस्ट में इज़रायल ने जवाबी कार्रवाई में ईरान के इस्फान शहर में रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के कमांड सेंटर और मिसाइल निर्माण सुविधाओं पर हमले किए हैं। इसके साथ ही इज़रायल ने लेबनान में भी हवाई हमले किए, जहां वह हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है।

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परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता से भी अधिक कट्टर माने जाते हैं। अब उनके पास ईरान की सेना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े फैसलों का पूरा नियंत्रण होगा। ऐसे में आने वाले समय में जंग और विकरला रूप ले सकता है। हालांकि, हालिया अमेरिकी हमलों में ईरान के कई परमाणु ठिकानों को नुकसान हुआ है, लेकिन देश के पास अब भी उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिससे परमाणु हथियार बनाने की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।

बढ़ता मानवीय नुकसान

इस युद्ध में अब तक भारी जनहानि हुई है। ईरान में अब तक लगभग 1,230 मौतें हो चुकी हैं, जबकि लेबनान में 397 और इज़रायल में 11 मौतें हो चुकी हैं। इनके अलावा अमेरिकी सैनिकों की भी कई मौतें हुई हैं। बहरहाल, मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि युद्ध के अगले चरण का संकेत माना जा रहा है, जिसका ऊर्जा बाजार, वैश्विक राजनीति और मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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