ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को किया बंद, जहाजों के गुजरने पर रोक; तेल सप्लाई बाधित
इस घटना से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। यूके मारिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी जहाजों को चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान पूरी तरह जलडमरूमध्य बंद नहीं कर पाएगा, क्योंकि इससे उसका भी तेल निर्यात प्रभावित होगा।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां जहाजों को गुजरने की इजाजत नहीं है। यह कदम अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के जवाब में उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को यूरोपीय संघ की नौसेना मिशन ऑपरेशन एस्पाइड्स के एक अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को वीएचएफ रेडियो पर संदेश मिले, जिसमें कहा गया कि कोई भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकता। ये संदेश ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से बताए गए हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका ने भी व्यावसायिक जहाजों से खाड़ी क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल निर्यात मार्ग है, जो सऊदी अरब, ईरान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों को खाड़ी से ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। अगर यह पूरी तरह बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। ईरान ने वर्षों से हमलों के जवाब में इस जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, लेकिन अब अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद यह कदम उठाया गया प्रतीत होता है।
क्यों इतनी बिगड़ गई बात
अमेरिका और इजरायल ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी हमले की खबरें आईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस बताया। इसके जवाब में ईरान ने ट्रुथफुल प्रॉमिस 4 नामक अभियान चलाया, जिसमें इजरायल और अमेरिकी सुविधाओं पर मिसाइल हमले किए गए। ईरान ने कतर, यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों पर भी हमले किए। तेहरान में विस्फोट, तेल अवीव में सायरन और क्षेत्रीय तनाव बढ़ गए हैं।
भारत पर भी होगा असर
इस घटनाक्रम से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। यूके मारिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी जहाजों को चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूर्ण रूप से जलडमरूमध्य बंद नहीं कर पाएगा, क्योंकि इससे उसकी खुद की तेल निर्यात प्रभावित होगी। फिर भी, यह स्थिति मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका को बढ़ा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है, जहां तेल कीमतें बढ़ने की आशंका है।
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