भारत के साथ कौन सा गठबंधन बनाने जा रहे नेतन्याहू? पाक में खलबली, देने लगा इस्लाम की दुहाई
नेतन्याहू के नए 'हेक्सागन अलायंस' ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। पीएम मोदी की इजरायल यात्रा से पहले भारत-इजरायल के बीच बन रहे इस महाशक्ति गठबंधन और पाक द्वारा दी जा रही 'इस्लाम' की दुहाई पर विस्तार से रिपोर्ट।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। हालिया घटनाक्रमों और पीएम मोदी की इजरायल यात्रा के बीच एक नए 'हेक्सागन अलायंस' की चर्चा ने पाकिस्तान समेत कई इस्लामी देशों की नींद उड़ा दी है। इसको लेकर मंगलवार को पाकिस्तानी संसद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के निशाने पर इजरायल और भारत रहे।
दरअसल हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक के दौरान एक विशेष गठबंधन का खाका पेश किया है, जिसे उन्होंने 'Hexagon of Alliances' यानी छह कोणीय गठबंधन का नाम दिया है। पाकिस्तान ने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है। पाकिस्तान ने अपने प्रस्ताव में 'मुस्लिम देशों का मुकाबला' करने के लिए भारत और अन्य देशों के साथ गठबंधन करने की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की योजना और उनकी टिप्पणियों की कड़ी निंदा की गई है।
नेतन्याहू का विवादित बयान और 'गठबंधनों का षट्कोण'
'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को एक कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा था कि उनका देश 'मध्य पूर्व के आसपास या उसके भीतर गठबंधनों का एक संपूर्ण तंत्र' बनाएगा।' उन्होंने इसे गठबंधनों का षट्कोण (Hexagon) बताया।
शामिल देश: इस गठबंधन में मुख्य रूप से भारत, इजरायल, ग्रीस, साइप्रस और कुछ उदारवादी अरब व अफ्रीकी देश शामिल होंगे।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में उभरते 'कट्टरपंथी धुरों' को रोकना है। नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से 'कट्टरपंथी शिया' और 'कट्टरपंथी सुन्नी' गुटों को चुनौती देने की बात कही है।
विशेष रणनीतिक साझेदारी: पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के रिश्तों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर ले जाने की तैयारी है, जो अमेरिका जैसे देशों के साथ इजरायल के संबंधों के बराबर होगा।
पाकिस्तान में खलबली और 'इस्लाम' की दुहाई
नेतन्याहू के इस बयान के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों और संसद (सीनेट) में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। पाकिस्तान की सीनेट ने 24 फरवरी को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें नेतन्याहू के इस 'गठबंधन' की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
मुस्लिम उम्माह का कार्ड: पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि यह गठबंधन 'मुस्लिम उम्माह' (वैश्विक मुस्लिम समुदाय) की एकता को तोड़ने की एक गहरी साजिश है। पाकिस्तानी नेताओं ने इसे इस्लाम और इस्लामी देशों की संप्रभुता पर हमला करार दिया है। पाकिस्तान को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा और खुफिया जानकारी का साझा होना उसे क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग कर देगा।
सोमालीलैंड को मान्यता देने का विरोध
इस प्रस्ताव में 'मुस्लिम देशों की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता' को कमजोर करने के इजरायल के किसी भी प्रयास की निंदा की गई। सीनेट ने सोमालिया के 'सोमालीलैंड' क्षेत्र की स्वतंत्रता को मान्यता देने की इजरायली घोषणा को भी सिरे से खारिज कर दिया। ज्ञात हो कि 26 दिसंबर, 2025 को इजरायल, सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश बन गया था। इसके बाद पाकिस्तान, 20 अन्य देशों और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) ने इसकी कड़ी निंदा की थी।
भारत-इजरायल की नई 'घातक' रक्षा डील
इस गठबंधन के साथ-साथ कुछ ऐसी रक्षा डील की खबरें भी आ रही हैं जिनसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। चर्चा है कि भारत इजरायल के अत्याधुनिक लेजर-आधारित हवाई रक्षा प्रणाली (Iron Beam या Or Eitan) का हिस्सा बन सकता है। दोनों देश मिसाइल तकनीक, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में साझा उत्पादन पर काम कर रहे हैं। रक्षा के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भारत की आर्थिक पैठ मध्य-पूर्व में और मजबूत होगी।
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