US-ईरान में तनातनी के बीच इजरायल क्यों जा रहे PM मोदी, MEA ने बताया एजेंडे में क्या-क्या?
MEA ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत-इजरायल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में हुई अहम तरक्की की समीक्षा करेंगे। दोनों नेता ग्लोबल मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और अमेरिका-ईरान में जंग की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर जा रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बुलावे पर उनका यह दौरा दो दिनों (25-26 फरवरी) का होगा। यह प्रधानमंत्री का दूसरा इजरायल दौरा होगा। यह दौरा कई मायनों में अहम है क्योंकि अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुए गाजा युद्ध के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली यात्रा है। साथ ही, यह 2017 के बाद 9 साल में उनकी पहली इजरायल यात्रा भी है, जब दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था।
इस बीच, विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत-इज़रायल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में हुई अहम तरक्की की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा विज्ञान और तकनीकी, नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार और अर्थव्यवस्था समेत आपसी लेन-देन जैसे सहयोग के अलग-अलग क्षेत्र में आगे के मौकों पर चर्चा करेंगे। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग से भी मुलाकात करेंगे।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस
बता दें कि भारत और इजरायल के बीच संबंधों का सबसे मजबूत आधार रक्षा और सुरक्षा सहयोग ही रहा है। पिछले एक दशक में भारत इजरायल से हथियार खरीदने वाला सबसे बड़ा देश रहा है। ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और बॉर्डर सुरक्षा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी है। सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में रक्षा उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और खुफिया सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है। इज़रायल के प्रधानमंत्री और PM मोदी के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
संतुलित कूटनीति: इजरायल और फिलिस्तीन दोनों से रिश्ते
भारत ने जहां एक ओर 7 अक्टूबर के हमले की कड़ी निंदा की थी, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन के लिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) के अपने पुराने रुख को भी बनाए रखा है। नई दिल्ली की नीति रही है कि वह इजरायल और फिलिस्तीन के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग (de-hyphenate) तरीके से आगे बढ़ाए। माना जा रहा है कि इस दौरे में पीएम मोदी भारत की इस प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाएंगे।
वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरण
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल वाले शांति प्रयासों और मध्य-पूर्व की बदलती राजनीति पर भी दोनों नेता इस दौरे के दौरान चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा। नेतन्याहू ने हाल ही में भारत को अपने प्रस्तावित “Hexagon of Alliances” का अहम हिस्सा बताया है, जिसमें ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब देशों को शामिल करने की योजना है।
इजरायल की घरेलू राजनीति भी बनेगी चर्चा का केंद्र
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजरायली संसद नेसेट को भी संबोधित कर सकते हैं, जो एक ऐतिहासिक क्षण होगा। हालांकि, यह संबोधन इज़रायल की आंतरिक राजनीति से प्रभावित हो सकता है। विपक्ष के नेता Yair Lapid ने चेतावनी दी है कि यदि परंपरा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट प्रमुख को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वे इस संबोधन का बहिष्कार कर सकते हैं। इज़रायल में न्यायिक सुधार को लेकर चल रहा विवाद पहले से ही राजनीतिक माहौल को गर्माए हुए है। बहरहाल, मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच भारत की संतुलित कूटनीति की एक अहम परीक्षा भी मानी जा रही है।




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