Explainer: ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता, भारत की कूटनीति पर क्यों उठने लगे सवाल
Explainer: ईरान और अमेरिका-इजरायल में युद्धविराम करवाने के लिए मध्यस्थता के लिए आगे आए देशों में पाकिस्तान का भी नाम है। विपक्ष इस बात को लेकर सरकार को घेर रहा है और इसे बड़ी कूटनीतिक हार बता रहा है।

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध को रुकवाने के लिए मध्यस्थता करने वाले देशों में पाकिस्तान का भी नाम सामने आ रहा है। पाकिस्तान ने भी कहा है कि ईरान युद्ध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के सभी हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से बातचीत कर रहा है। वहीं विपक्ष इसे भारत की कूटनीति की पराजय बता रहा है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि वैश्विक संकट के दौरान भारत इस अवसर का कोई फायदा नहीं उठा पाया जबकि पाकिस्तान बाजी मार गया है। उसे अंतरराषट्र्रीय स्तर पर भारत से ज्यादा तरजीह मिली है।
कांग्रेस मोदी सरकार को इस बात पर भी घेर रही है कि इजरायल की यात्रा से लौटते ही यहूदी देश ने ईरान पर धावा बोल दिया। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल में युद्ध के खिलाफ बातें करके आए थे। ईरान अब भी भारत को काफी तरजीह दे रहा है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत के जहाज निर्बाध तरीके से निकल सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बात की और विदे मंत्रालय संपर्क में है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी किया था पीएम मोदी को फोन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी। हालांकि जानकारों का कहना है कि जब युद्ध होता है तो दुनिया भारत की ओर देखती है। इस बार भी स्थिति यही थी। हालांकि भारत शांति वार्ता की अगुआई नहीं कर सकता और पाकिस्तान का नाम मध्सत्थता के लिए आने लगा। ऐसे में यह भारत की कूटनीति के लिए बड़ा झटका है।
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा था कि पाकिस्तान मध्य-पू्र्व में चल रहे युद्ध को खत्म करवाने के लिए बातचीत का समर्थन करता है। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने शरीफ के इस बयान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया। ऐसे में यही कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका भी पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए तैयार हो गया है। इससे पहले भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ डोनाल्ड ट्रंप के बुलावे पर अमेरिका गए थे।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान और अन्य देश मिलकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कीजमीन तैयार करने में लगे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया था जवाब
मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम ने भी इस बात को लेकर पाकिस्तान की तारीफ की है। कूटनीति पर उठे सवालों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्होंने पश्चिम एशिया के सभी नेताओं से बात की है और तनाव कम करने की अपील भी की है। उन्होंने यह भी कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप से भी उनकी सीधी बात हुई है और इस बातचीत में भी शांति और स्थिरता स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
विपक्ष का पक्ष
विपक्ष का कहना है कि देश की विदेश नीति के साथ समझौता किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इजरायल और अमेरिका के इशारे पर काम करते हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी विदेश नीति को निशाने पर लिया और कहा कि ईरान और भारत के बीच अच्छे रिश्ते हैं। इसके अलावा अमेरिका के साथ भी भारत के अच्छे रिश्ते हैं। इसका फायदा भी भारत को उठाना चाहिए था और मध्यस्थता के लिए खुद को आगे करना चाहिए था। यह काम पाकिस्तान, तुर्की और कतर ने कर दिखाया। अब शांति वार्ता का कोई भी श्रेय भारत को नहीं मिलने वाला है।
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