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ट्रंप के आगे नहीं झुका एंथ्रोपिक, लगा दिया 'बैन'; फिर उसी के AI से कैसे किया खामेनेई का खात्मा?

एंथ्रोपिक ने पेंटागन की शर्तें ठुकराईं तो डोनाल्ड ट्रंप ने बैन लगा दिया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत में अमेरिकी सेना ने उसी 'Claude' AI का इस्तेमाल किया। इस सबसे बड़े ड्रामे की पूरी कहानी पढ़ें।

Tue, 3 March 2026 07:24 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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ट्रंप के आगे नहीं झुका एंथ्रोपिक, लगा दिया 'बैन'; फिर उसी के AI से कैसे किया खामेनेई का खात्मा?

तकनीकी दुनिया के आदर्शों और राष्ट्रीय सुरक्षा की हदों के बीच एक अभूतपूर्व टकराव तब देखने को मिला, जब 'सेफ्टी-फर्स्ट' एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की मनमानी शर्तों के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ट्रंप प्रशासन ने बदले की कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया। लेकिन इस पूरी राजनीतिक और कूटनीतिक उथल-पुथल की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस कंपनी को अमेरिकी सरकार ने 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताकर प्रतिबंधित किया, उसी के एआई मॉडल 'क्लॉड' (Claude) का इस्तेमाल इस बैन के महज कुछ घंटों बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मारने वाले ऐतिहासिक सैन्य ऑपरेशन में किया गया; जो यह साबित करता है कि आधुनिक युद्ध में एआई की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि दुनिया की सबसे ताकतवर सरकार भी चाहकर उसे रातों-रात अपने सिस्टम से उखाड़ कर नहीं फेंक सकती। आइए इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम को शुरू से लेकर आखिर तक विस्तार से समझते हैं।

200 मिलियन डॉलर की डील और विवाद की शुरुआत

लगभग दो साल से, एंथ्रोपिक (जिसका AI मॉडल 'Claude' है) अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के साथ मिलकर काम कर रहा था। कंपनी ने पेंटागन के साथ 200 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था। क्लॉड (Claude) इकलौता ऐसा प्रमुख AI सिस्टम था जिसे अमेरिकी सेना के बेहद संवेदनशील और क्लासिफाइड नेटवर्क पर काम करने की मंजूरी मिली हुई थी।

विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रंप प्रशासन के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एंथ्रोपिक से मांग की कि वह सेना को किसी भी वैध सैन्य उद्देश्य के लिए बिना किसी रोक-टोक के क्लॉड का इस्तेमाल करने दे।

एंथ्रोपिक की 'रेड लाइन्स' और झुकने से इनकार

एंथ्रोपिक खुद को एक सुरक्षा-प्रथम AI कंपनी मानता है। कंपनी के CEO डारियो एमोदेई ने सरकार की इस मांग को साफ ठुकरा दिया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा में मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी दो सख्त शर्तें हैं जिन्हें वे किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ेंगे:

बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी: अमेरिकी नागरिकों की मास सर्विलांस के लिए उनके AI का इस्तेमाल नहीं होगा।

स्वचालित हथियार (किलर रोबोट): पूरी तरह से स्वचालित हथियारों में इसका इस्तेमाल नहीं होगा, जहां बिना इंसानी दखल के AI खुद किसी की जान लेने का फैसला करे।

पेंटागन का तर्क था कि अमेरिकी कानून तय करेगा कि AI का इस्तेमाल कैसे हो, न कि किसी प्राइवेट कंपनी के नियम और शर्तें।

ट्रंप का एक्शन और ब्लैकलिस्टिंग

जब एंथ्रोपिक अपने उसूलों से पीछे नहीं हटा, तो शुक्रवार (27 फरवरी 2026) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया:

ट्रंप ने सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक की तकनीक का इस्तेमाल तुरंत बंद करने का आदेश दिया।

पेंटागन ने एंथ्रोपिक को सप्लाई-चेन रिस्क घोषित कर दिया। यह एक ऐसा तमगा है जो आमतौर पर विदेशी दुश्मन कंपनियों को दिया जाता है। इसका मतलब था कि कोई भी डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर अब एंथ्रोपिक के साथ काम नहीं कर सकता।

इसी बीच, प्रतिद्वंद्वी कंपनी OpenAI (सैम ऑल्टमैन की कंपनी) ने तुरंत मौके का फायदा उठाया और पेंटागन के साथ नई डील साइन कर ली।

कहानी में ट्विस्ट: ईरान पर हमला और बैन के बावजूद क्लॉड का इस्तेमाल

अब आता है इस कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़। ट्रंप द्वारा बैन लगाए जाने के महज कुछ घंटों बाद (शनिवार की सुबह), अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बड़ी एयरस्ट्राइक की, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के कमांड सेंटर ने इस पूरे हमले की योजना और एग्जीक्यूशन में एंथ्रोपिक के क्लॉड (Claude) AI का ही इस्तेमाल किया था!

AI ने हमले में क्या किया? क्लॉड कोई मिसाइल नहीं चलाता, बल्कि इसका इस्तेमाल खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने, टारगेट की सटीक पहचान करने और युद्ध के परिदृश्यों को सिमुलेट करने के लिए किया गया।

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बैन के बावजूद इस्तेमाल क्यों? दरअसल, क्लॉड अमेरिकी सेना के 'मेवन स्मार्ट सिस्टम' और Palantir जैसी कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर में इतनी गहराई तक जुड़ा हुआ है कि इसे रातों-रात हटाना संभव नहीं है। सेना के अधिकारी इस टूल के इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि ट्रंप सरकार को इसे सिस्टम से पूरी तरह हटाने के लिए 6 महीने का 'फेज-आउट' पीरियड देना पड़ा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने सिलिकॉन वैली और वाशिंगटन के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। एंथ्रोपिक ने यह साबित किया कि कोई टेक कंपनी अपने एथिक्स और उसूलों के लिए दुनिया की सबसे ताकतवर सेना से भी टकरा सकती है। वहीं दूसरी ओर, ईरान हमले ने यह दिखा दिया कि आधुनिक युद्ध प्रणाली में AI किस हद तक अपरिहार्य हो चुका है, जिसे सरकार चाहकर भी तुरंत अपने सिस्टम से बाहर नहीं कर सकती।

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