Snakebite poisoning declared notifiable disease in Himachal Pradesh हिमाचल में अब इस जानवर के काटने को माना जाएगा 'अधिसूचित बीमारी', मौतें रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
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हिमाचल में अब इस जानवर के काटने को माना जाएगा 'अधिसूचित बीमारी', मौतें रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम

भारती ने बताया कि सांप का काटना एक नजरअंदाज की जाने वाली ट्रॉपिकल बीमारी रही है, जो भारत में हर साल लगभग 50,000 लोगों की जान ले लेती है, क्योंकि सांप के काटने के मैनेजमेंट में सामाजिक और मेडिकल तौर पर लगातार कमी रही है।

Wed, 4 March 2026 12:40 AMSourabh Jain पीटीआई, शिमला, हिमाचल प्रदेश
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हिमाचल में अब इस जानवर के काटने को माना जाएगा 'अधिसूचित बीमारी', मौतें रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य में सांप के काटने को एक 'अधिसूचित बीमारी' (नोटिफिएबल डिसीज) घोषित कर दिया है। यह कदम केंद्र सरकार के 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एनवेनमिंग' (NAPSE) के अंतर्गत उठाया गया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकना है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल अकेले हिमाचल में ही सांप के काटने से लगभग 100 मौतें होती हैं।

इस बारे में पिछले हफ्ते स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके अनुसार, अब राज्य के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ मेडिकल प्रैक्टिशनरों के लिए सांप के काटने के हर संदिग्ध मामले और उससे होने वाली मौत की रिपोर्ट संबंधित पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी को देना अनिवार्य होगा।

सटीक आकंड़ा रखने में मिलेगी मदद

इस संबंध में जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि इस प्रक्रिया से सांप के काटने की घटनाओं का सटीक आंकड़ा रखने, एंटी-स्नेक वेनम और अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, हाई-रिस्क एरिया की पहचान करने और सांप के काटने के शिकार लोगों की मौत के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी, जिससे सांप के काटने के मामलों का बेहतर क्लिनिकल मैनेजमेंट हो सकेगा।

विशेषज्ञ ने बताया एक बड़ा कदम

सांप के काटने से होने वाली पॉइजनिंग पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के एक्सपर्ट पैनल के मेंबर, और सांप के काटने की रोकथाम और कंट्रोल पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. ओमेश भारती ने मंगलवार को कहा कि सांप के काटने के मामलों और मौतों को जरूरी बनाने वाला नोटिफिकेशन राज्य में सांप के काटने से होने वाली पॉइजनिंग की रोकथाम और कंट्रोल की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ग्रामीण इलाकों में अब भी है चुनौती

भारती ने बताया कि सांप के काटने से भारत में हर साल लगभग 50,000 लोगों की जान चली है, क्योंकि सांप के काटने के मैनेजमेंट में सामाजिक और मेडिकल तौर पर लगातार कमी रही है। हालांकि हेल्थ अधिकारियों का दावा है कि हिमाचल प्रदेश समेत देश भर के 13 राज्यों के एक नए सर्वे के मुताबिक, भारत में सांप के काटने से होने वाली मौतों में भारी कमी आई है, फिर भी राज्य के ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने की घटनाएं अभी भी एक चुनौती बनी हुई हैं।

ओझा या तांत्रिक नष्ट करते हैं कीमति समय

डॉ. ओमेश भारती ने कहा कि ‘सांप के काटने के बाद अक्सर लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय पारंपरिक ओझा या तांत्रिकों के पास जाते हैं, जिससे इलाज में देरी होती है और मरीज की हालत बिगड़ जाती है। इसके अलावा, छोटे स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर अक्सर सही उपकरण और प्रशिक्षण की कमी के कारण सांप के काटने हुए लोगों का इलाज करने से डरते हैं, और मरीजों को हायर सेंटर में रेफर कर देते हैं, जिससे कीमती समय बर्बाद होता है और इलाज में और देरी होती है।’

मौजूदा कमियों को किया जा रहा कम

डॉ. भारती ने कहा कि सांप के काटने से होने वाले जहर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करके, मौजूदा कमियों को कम किया जा सकता है और पॉलिसी में दखल देकर मौतों को और कम किया जा सकता है क्योंकि इससे सांप के काटने की घटनाओं और मौतों के बारे में सही डेटा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से हिमाचल में सांप के काटने के हॉटस्पॉट की मैपिंग करने में मदद मिलेगी ताकि टारगेटेड एक्शन लिया जा सके।

सांप के काटने से होने वाले ज़हर की रोकथाम और कंट्रोल के लिए नेशनल एक्शन प्लान दो साल पहले लॉन्च किया गया था, जिसमें राज्यों से सांप के काटने के ज़हर को नोटिफ़ाएबल बीमारी बनाने और इस बारे में राज्य एक्शन प्लान का ड्राफ़्ट बनाने की अपील की गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के सेक्शन 12 (1) (iii) और 42 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लॉन्च किया था।

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भारत में हर साल लगभग 50 हजार लोग सांप के काटने से अपनी जान गंवाते हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो साल पहले राष्ट्रीय कार्ययोजना शुरू की थी, जिसमें राज्यों से इसे 'नोटिफिएबल डिजीज' घोषित करने का आग्रह किया गया था। हिमाचल प्रदेश अब उन 10 से अधिक राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने इस दिशा में कदम उठाए हैं। वर्तमान में हिमाचल सरकार सांप के काटने से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने के लिए एक 'स्टेट एक्शन प्लान' का ड्राफ़्ट भी बना रही है।

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हिमाचल प्रदेश ने सांप के काटने को अधिसूचित बीमारी घोषित कर सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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इस कदम से सांप के काटने के मामलों का सही आंकड़ा रखने और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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सांप के काटने से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए यह एक रणनीतिक पहल है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत में मौतों को शून्य पर लाना है।

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