HC का सुक्खू सरकार को झटका, नगर निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनने के लिए विधायकों के वोट डालने पर रोक
हिमाचल प्रदेश में नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को चुनने के लिए विधायकों के वोट डालने पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सुक्खू सरकार बैकफुट पर आ गई है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर राज्य की सूक्खु सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस सरकारी स्पष्टीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके आधार पर स्थानीय विधायक इन चुनावों में मतदान कर सकते थे।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। इसके साथ ही फिलहाल विधायक नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। मामला कुछ निर्वाचित पार्षदों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल जनता द्वारा चुने गए पार्षदों का अधिकार है। उनके अनुसार विधायक नगर निकायों के कामकाज और प्रस्तावों पर मतदान का अधिकार रख सकते हैं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में भाग नहीं ले सकते।
सरकार के किस स्पष्टीकरण को चुनौती दी थी?
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि जब नामित सदस्य इन चुनावों में मतदान नहीं कर सकते, तो विधायकों को भी यह अधिकार नहीं दिया जा सकता। उन्होंने सरकार के उस स्पष्टीकरण को चुनौती दी थी, जिसमें विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान का अधिकार बताया गया था।
अगली सुनवाई 17 जून को तय
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए सरकारी स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 जून को तय की है।हाईकोर्ट के इस आदेश का असर प्रदेश के उन नगर निकायों पर पड़ सकता है, जहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव होने हैं। फिलहाल इन चुनावों में विधायकों की भूमिका पर रोक लग गई है और अंतिम फैसला आने तक केवल निर्वाचित पार्षदों के मतदान अधिकार का सवाल केंद्र में रहेगा।
नगर परिषदों में भाजपा का रहा दबदबा, नगर पंचायतों में कांग्रेस आगे
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में बीते 17 मई को शहरी निकाय चुनाव के लिए 69.76 फीसदी मतदान हुआ था। इसी दिन देर शाम आये नतीजों में दिलचस्प तस्वीर सामने आई। राज्य की 25 नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला, जबकि 22 नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आगे रहे। कुल 47 शहरी निकायों के नतीजों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार 22 निकायों में बढ़त बनाने में सफल रहे, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 17 निकायों में जीत दर्ज की। चार निकायों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों का प्रभाव रहा, जबकि चार जगह मुकाबला बराबरी पर छूटा।
भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा। खासकर बिलासपुर, सुंदरनगर, मनाली और नालागढ़ जैसे शहरी इलाकों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने मजबूत बढ़त दर्ज की। दूसरी ओर नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने बेहतर तालमेल और स्थानीय समीकरणों के दम पर बढ़त बनाई।25 नगर परिषदों की बात करें तो भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 14 नगर परिषदों में बढ़त हासिल की। इनमें बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयनादेवी, डलहौजी, नगरोटा बगवां, मनाली, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, रामपुर, परवाणू, नालागढ़, नाहन, संतोषगढ़ और मेहतपुर शामिल हैं।
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने पांच नगर परिषदों में जीत दर्ज की। इनमें कांगड़ा, नूरपुर, देहरा, ज्वालामुखी और नेरचौक शामिल हैं। तीन नगर परिषदों में निर्दलीयों और अन्य उम्मीदवारों ने बाजी मारी। सुजानपुर, कुल्लू और पांवटा साहिब में किसी एक दल का दबदबा नहीं दिखा और स्थानीय उम्मीदवारों ने बड़ी पार्टियों को कड़ी चुनौती दी। इसके अलावा चंबा, सरकाघाट और ठियोग नगर परिषदों में भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रही। यहां दोनों दलों के उम्मीदवार लगभग बराबरी पर रहे और स्पष्ट बढ़त किसी पक्ष को नहीं मिल सकी। नगर पंचायतों के नतीजों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भाजपा पर भारी पड़े। 22 नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 12 जगह जीत दर्ज की। इनमें चुवाड़ी, शाहपुर, भुंतर, निरमंड, बंजार, रिवालसर, करसोग, चौपाल, जुब्बल, चिड़गांव, राजगढ़ और दौलतपुर चौक शामिल हैं।
भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को आठ नगर पंचायतों में सफलता मिली। इनमें तलाई, सुन्नी, कोटखाई, अर्की, कंडाघाट, गगरेट, टाहलीवाल और अंब शामिल हैं।नेरवा नगर पंचायत में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा, जबकि भोटा नगर पंचायत में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। यहां मुकाबला त्रिकोणीय रहा और नतीजा त्रिशंकु स्थिति में पहुंच गया।
शिमला जिले के नतीजे कैसे रहे?
शिमला जिला के नतीजों ने भी अलग तस्वीर पेश की। चौपाल और जुब्बल नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आगे रहे, जबकि कांग्रेस के गढ़ कोटखाई में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के वर्चस्व वाली रामपुर नगर परिषद भाजपा के खाते में गई, जबकि ठियोग में मुकाबला बराबरी पर रहा।
कांगड़ा में भी कांग्रेस छाई
कांगड़ा जिला में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। कांगड़ा, नूरपुर, देहरा और ज्वालामुखी नगर परिषदों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिली। वहीं नगरोटा बगवां में भाजपा समर्थित उम्मीदवार आगे रहे। इन चुनावों में कई जगह स्थानीय मुद्दे और बागी उम्मीदवार भी अहम रहे। पांवटा साहिब, कुल्लू और सुजानपुर जैसे इलाकों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों का समीकरण बिगाड़ा। वहीं चंबा, सरकाघाट और ठियोग जैसे इलाकों में कड़ी टक्कर ने मुकाबले को रोचक बनाए रखा।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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