हिमाचल पंचायत चुनाव में 96 वर्षीय बुजुर्ग ने किया कमाल, खुद जीती उपप्रधानी; बहू बन गईं प्रधान
इस परिवार की राजनीतिक सक्रियता यहीं तक सीमित नहीं है। शंकर सिंह के बेटे भी सुंदरनगर के डैहर वार्ड से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव में मिली यह जीत परिवार के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।

जिस उम्र में लोग घर की चौखट तक सीमित हो जाते हैं, उस उम्र में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के 96 वर्षीय वयोवृद्ध शंकर सिंह चुनाव मैदान में उतरे, जनता के बीच गए और फिर ऐसी जीत दर्ज की कि पूरा सुंदरनगर क्षेत्र उनकी चर्चा कर रहा है। पंचायत चुनाव में शंकर सिंह ने उपप्रधान पद पर शानदार जीत हासिल की, जबकि उनकी बहू नीलम कुमारी प्रधान चुनी गईं। एक ही परिवार की यह दोहरी जीत अब हिमाचल पंचायत चुनाव के सबसे दिलचस्प नतीजों में गिनी जा रही है।
सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चनोल में मंगलवार देर रात को जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित हुए, पंचायत में जश्न का माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंजने लगी, समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और गांव में जीत का उत्साह देर तक दिखाई दिया। सबसे ज्यादा चर्चा 96 वर्षीय शंकर सिंह की जीत को लेकर रही। उन्होंने उपप्रधान पद के चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 172 मतों के बड़े अंतर से हराया।
बुजुर्ग की जीत ने सभी को चौंकाया
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के पहले चरण में कई रोचक और हैरान करने वाले नतीजे सामने आए हैं, लेकिन चनोल पंचायत का यह परिणाम लोगों को खासतौर पर आकर्षित कर रहा है। नब्बे की उम्र के पड़ाव में बहुत कम ऐसा देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति सामाजिक और राजनीतिक जीवन में इतना सक्रिय हो कि चुनाव लड़ने उतरे और फिर भारी मतों से जीत भी जाए। यही वजह है कि शंकर सिंह की जीत को लोग जनसेवा, अनुभव और जनता के भरोसे की बड़ी मिसाल मान रहे हैं।
लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे
शंकर सिंह लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे हैं और इलाके में उन्हें पार्टी का समर्पित एवं पुराने दौर का कार्यकर्ता माना जाता है। उन्होंने वर्षों तक गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच रहकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि शंकर सिंह हमेशा गांव के लोगों के सुख-दुख में शामिल रहे और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
बहू नीलम कुमारी जीतीं प्रधान का पद
इस चुनाव में परिवार को दूसरी बड़ी सफलता तब मिली, जब उनकी बहू नीलम कुमारी प्रधान पद का चुनाव जीत गईं। पंचायत में अब प्रधान और उपप्रधान दोनों पद एक ही परिवार के पास आ गए हैं। इसे परिवार की मजबूत सामाजिक पकड़ और लोगों के विश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है।
बहू के अलावा बेटा भी राजनीति में सक्रिय
परिवार की राजनीतिक सक्रियता यहीं तक सीमित नहीं है। शंकर सिंह के बेटे भी सुंदरनगर के डैहर वार्ड से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव में मिली यह जीत परिवार के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।
ग्राम पंचायत चनोल के लोगों को उम्मीद है कि प्रधान नीलम कुमारी और उपप्रधान शंकर सिंह मिलकर पंचायत के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और ग्रामीण हितों के लिए काम करेंगे। पंचायत में मिली इस ऐतिहासिक जीत की चर्चा अब पूरे सुंदरनगर क्षेत्र में हो रही है।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण के तहत मंगलवार को 1293 पंचायतों में मतदान हुआ था। दूसरे चरण का मतदान अब गुरुवार को होना है, जिसमें 1276 पंचायतों में करीब 17.30 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। तीसरा और अंतिम चरण 30 मई को आयोजित किया जाएगा।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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