जब मोदी ने कहा ‘ईमेल’, तो भाजपा नेता ने पूछा ‘क्या फीमेल’; किताब लॉन्च के मौके पर शिवराज ने सुनाया जोरदार किस्सा
शिवराज ने आगे कहा, 'युवा मोर्चा का अध्यक्ष होने के नाते मैं जब भी उनसे मिलने जाता था, तो अभी तक मुझे याद है कि कानों पर उनके मफलर बंधा रहता था, और वो कंप्यूटर पर लगातार काम करते दिखाई देते थे। नरेंद्र भाई तब भी भविष्य देख रहे थे। वे समझ चुके थे कि आने वाले भारत की ताकत टेक्नोलॉजी बनेगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अनुभवों पर आधारित अपनी संस्मरण किताब 'अपनापन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव' का विमोचन किया। इस किताब में उन्होंने पीएम मोदी के साथ पहली मुलाकात से अबतक अपने 35 साल के अनुभव से जुड़े किस्सों के बारे में बताया है। इसी किताब के विमोचन के लिए मौके पर उन्होंने मोदी से जुड़े कई किस्से भी सुनाए, उन किस्सों में से एक किस्सा ऐसा भी था, जिसे जानने के बाद सबकी हंसी छूट गई। यह किस्सा 98 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले का है, उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, और एक बैठक के लिए कई भाजपा नेता एक कमरे में बैठे हुए थे और उनमें से किसी को भी यह पता ही नहीं था कि 'ईमेल ID' क्या होता है
किताब के लॉन्च के मौके पर वह किस्सा सुनाते हुए चौहान ने कहा, 'उस समय नरेंद्र (मोदी) भाई मध्य प्रदेश का प्रभारी बनकर आए, मैं प्रदेश का महामंत्री था। चुनाव की तैयारियों के संबंध में एक बैठक हुई, उस बैठक में नरेंद्र भाई ने पूछा कि भाई ये बताओ किस-किस के पास ईमेल आईडी है?' आगे शिवराज ने कहा, 'अब वहां तो ईमेल आईडी से दूर-दूर तक किसी का वास्ता ही नहीं था, लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे, कुछ क्षण के लिए वहां सन्नाटा छा गया, इसके बाद वहां मौजूद बाबूलाल जी गौर (जो आगे चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने) बोले- नरेंद्र भाई, ये क्या फीमेल-फीमेल कर रहे हो, ये फीमेल-ईमेल से क्या होने वाला है। और ये कहकर वे हंसने लगे। वहां मौजूद अन्य कुछ लोगों के चेहरे पर भी व्यंग्यात्मक भाव आ गए। हालांकि कुछ सालों बाद लोगों को ईमेल आईडी का महत्व पता चला।'
'वो समय से पहले उनकी व्यवस्था करने का काम करते हैं'
शिवराज ने आगे कहा, 'युवा मोर्चा का अध्यक्ष होने के नाते मैं जब भी उनसे मिलने जाता था, तो अभी तक मुझे याद है कि कानों पर उनके मफलर बंधा रहता था, और वो कंप्यूटर पर लगातार काम करते दिखाई देते थे। उनको पता था, आगे अगर भारत का भाग्य बनाना है, विकसित भारत का निर्माण करना है, तो टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी है। ये टेक्नोलॉजी का प्रेम उन्होंने उस समय समझा। वो बहुत समय से बहुत पहले, बहुत दूर की देख लेते हैं, आने वाली चीजों को भांपते हैं, और समय से पहले उनकी व्यवस्था करने का काम करते हैं।'
'सोशल मीडिया का महत्व भी समय से पहले पहचाना'
आगे एक दूसरा किस्सा सुनाते हुए शिवराज ने कहा, 'केवल ईमेल आईडी या कंप्यूटर ही नहीं, उसके आगे देखेंगे तो पाएंगे कि टेक्नोलॉजी का जैसा उपयोग उन्होंने किया, सोशल मीडिया के महत्व को जितना उन्होंने समझा, उतना किसी ने भी नहीं समझा। उस वक्त जब मैं मध्य प्रदेश में काम करता था तो मेरे जैसा कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया को कोई महत्व नहीं देता था, लेकिन उन्होंने मुझे बुलाकर कहा, हर विधायक व सांसद से कह देना कि 50 हजार से कम फॉलोअर हुए तो इस बार टिकट नहीं मिलेगा।'
बैठक में पूरी जानकारी खुद मोदी ने दी
आगे शिवराज ने कहा कि 'मुख्यमंत्री बनने के बाद जब मैं गुजरात की योजनाएं समझने नरेंद्र भाई के पास गया, तब मैंने सोचा था कि वहां अधिकारी ही विकास से जुड़ी जानकारियां देंगे। लेकिन मैं उस वक्त बेहद आश्चर्यचकित रह गया, जब खुद मोदी जी खुद उस बैठक में उपस्थित हुए और हर योजना को उन्होंने पूरे रुचि से विस्तार के साथ समझाया।' शिवराज ने कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को हर क्षण देश के लिए जीते हुए देखा है। उनसे मैंने जो अनुभव प्राप्त किया, उसे 'अपनापन' पुस्तक के माध्यम से देश को समर्पित कर रहा हूं।'




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