Himachal Govt to Amend Rules to Curb Arbitrary Fee Hikes by Private Schools निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाएगी सुक्खू सरकार, नियमों में करेगी संशोधन, Himachal-pradesh Hindi News - Hindustan
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निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाएगी सुक्खू सरकार, नियमों में करेगी संशोधन

शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और हरियाणा सहित कई राज्यों में निजी स्कूलों की फीस को लेकर नियमों में बदलाव किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार भी इन्हीं राज्यों की तर्ज पर नियमों में संशोधन करेगी।

Fri, 27 March 2026 07:31 PMMohit लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाएगी सुक्खू सरकार, नियमों में करेगी संशोधन

हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की शिकायतों के बीच राज्य सरकार नियमों में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को विधानसभा में विधायक राम कुमार के प्रश्न के जवाब में दी।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और हरियाणा सहित कई राज्यों में निजी स्कूलों की फीस को लेकर नियमों में बदलाव किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार भी इन्हीं राज्यों की तर्ज पर नियमों में संशोधन करेगी, जिससे निजी स्कूलों द्वारा ज्यादा फीस वसूलने पर नियंत्रण किया जा सके।

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'फीस तय करने का कोई प्रावधान नहीं है'

उन्होंने बताया कि फिलहाल हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की निगरानी हिमाचल प्रदेश रेगुलेशन एक्ट, 1997 के तहत की जाती है। इस कानून के तहत निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाती है, लेकिन इसमें फीस तय करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में निजी स्कूलों की फीस सरकार तय नहीं करती है। हालांकि यदि किसी विधायक या जनप्रतिनिधि के पास ज्यादा फीस वसूलने से जुड़े ठोस मामले हैं तो उनकी जानकारी सरकार को दी जाए, जिससे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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किन सीटों पर दाखिले बहुत कम हो रहे थे?

शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिला देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पहले इन सीटों पर दाखिले बहुत कम हो रहे थे, लेकिन राज्य सरकार ने इस संबंध में विशेष जागरूकता अभियान चलाया और शिक्षा विभाग के स्तर पर प्रचार-प्रसार बढ़ाया।

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'अभी और काम किए जाने की जरूरत है'

उन्होंने बताया कि पहले ऐसे विद्यार्थियों के केवल करीब 650 दाखिले ही हो पाए थे, लेकिन जागरूकता अभियान के बाद यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने माना कि इस दिशा में अभी और काम किए जाने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का लाभ मिल सके।

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