हिमाचल में डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार ने चेताया, अस्पतालों के लिए सख्त SOP
हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इस बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने साफ किया है कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने अस्पतालों को लिए सख्त एसओपी भी जारी की है।

हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। सूबे के विभिन्न अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने अस्पतालों को लिए सख्त एसओपी जारी की है। वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को गलत करार दिया है। सीएम ने डॉक्टरों से अपना अहंकार छोड़कर वापस ड्यूटी पर लौटने की अपील की है।
दोबारा जांच की बात कही फिर भी हड़ताल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं डॉक्टरों को आश्वासन दिया था कि उनके मामले की दोबारा जांच करवाई जाएगी, इसके बावजूद डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों को मुख्यमंत्री की बात पर भरोसा करना चाहिए था और मरीजों के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।
सरकार 75 लाख प्रदेशवासियों के साथ
दिल्ली से शिमला लौटने के बाद रविवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार 75 लाख प्रदेशवासियों के साथ खड़ी है और किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार मरीजों के साथ भी है और डॉक्टर भी सरकार के लिए परिवार के सदस्य जैसे हैं। ऐसे में हड़ताल के कारण आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों को तुरंत हड़ताल समाप्त कर ड्यूटी पर लौटना चाहिए।
हड़ताल पर जाने का औचित्य समझ से परे- सीएम
मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से आग्रह किया है कि वे सोमवार से काम पर लौटें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल पर जाने का औचित्य समझ से परे है। शनिवार को रेजिडेंट डॉक्टर मिले थे और उस दौरान मैंने भरोसा दिया था कि संबंधित मामले की दोबारा जांच करवाई जाएगी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सीनियर डॉक्टरों को अपने सरकारी आवास पर बुलाकर इस पूरे मामले पर बातचीत करेंगे, ताकि समाधान निकाला जा सके।
अहंकार छोड़ें डॉक्टर
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि रेजिडेंट डॉक्टरों को अपना अहंकार छोड़कर मरीजों की सेवा के लिए वापस आना चाहिए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होना गंभीर विषय है और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। सरकार किसी भी कीमत पर मरीजों के इलाज में बाधा नहीं चाहती।
स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव निरूला की टर्मिनेशन के विरोध में प्रदेशभर के रेजिडेंट डॉक्टर शनिवार से हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के चलते कई अस्पतालों में रूटीन सेवाएं और नियमित ऑपरेशन बंद रहे, जिससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था।
ठोस कदम उठाने की मांग
आईजीएमसी शिमला में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टरों ने पिछले कल प्रदर्शन किया था और डॉ. राघव निरूला की बर्खास्तगी को अन्यायपूर्ण बताया। डॉक्टरों का कहना है कि मारपीट के एक मामले में बिना पक्ष सुने ही सख्त कार्रवाई की गई। एसोसिएशन ने डॉ. राघव की टर्मिनेशन रद्द करने और अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
जारी रहीं इमरजेंसी सेवाएं
हालांकि राहत की बात यह थी कि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं और इमरजेंसी मामलों में इलाज हुआ। आईजीएमसी में कुछ असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों ने ओपीडी में मरीजों को देखा। इसके बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अगर डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही, तो अस्पतालों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

अस्पतालों के लिए सख्त एसओपी जारी
सोमवार को पहला वर्किंग डे होने की वजह से भारी तादाद में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। इस बीच चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने हड़ताल के मद्देनजर सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के लिए सख्त एसओपी जारी किए हैं। सरकार ने साफ किया है कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसके लिए प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और कंसल्टेंट डॉक्टर जिम्मेदार होंगे।
वायरल हो गया था वीडियो
सरकार का कहना है कि मरीजों का हित सर्वोपरि है। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 22 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब चौपाल उपमंडल के कुपवी क्षेत्र के निवासी अर्जुन पंवार इलाज के लिए आईजीएमसी पहुंचे थे। आरोप है कि वार्ड में लेटने को लेकर डॉक्टर और मरीज के बीच कहासुनी हुई, जो मारपीट में बदल गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग बड़ी संख्या में आईजीएमसी पहुंचे।
सरकार के ऐक्शन के विरोध में डॉक्टर
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करवाई और 24 दिसंबर को जारी आदेश में कहा कि प्रारंभिक जांच, वीडियो फुटेज और तथ्यों के आधार पर डॉक्टर और मरीज दोनों को दोषी पाया गया। इसे सरकारी सेवा आचरण नियमों और रेजिडेंट डॉक्टर नीति-2025 का उल्लंघन मानते हुए सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। इसी फैसले के विरोध में अब प्रदेश भर के रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
रिपोर्ट- यूके शर्मा
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