कच्छ में आए भूकंप ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, सक्रिय हो रही 3 और फॉल्टलाइन; क्या है खतरा
शुक्रवार को कच्छ में सुबह आए 4.6 तीव्रता के भूकंप आया। इस भूकंप ने सिर्फ घरों को हिलाया, बल्कि भू-वैज्ञानिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। तीन और फॉल्ट लाइन के सक्रिय होने का खतरा बढ़ गया है।

शुक्रवार को कच्छ में सुबह आए 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप ने ना सिर्फ घरों को हिलाया, बल्कि वैज्ञानिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। इस भूकंप ने क्षेत्र की भूकंपीय तस्वीर में नया मोड़ लाते हुए तीन कम सक्रिय फॉल्ट लाइनों के सक्रिय होने के संकेत दिए हैं। इस घटना के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि कच्छ की भूकंप संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
शुक्रवार सुबह 4.30 बजे कच्छ में एक बड़ा झटका आया, जिसके बाद 30 घंटे के भीतर 23 आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। भूकंप का केंद्र नॉर्थ वागड़ फॉल्ट के पास रहा, जिसे पहले ज्यादा सक्रिय नहीं माना जाता था। लेकिन हालिया आंकड़ों से पता चला है कि कठरोल हिल, गोरा डोंगर और नॉर्थ वागड़, तीनों फॉल्ट लाइनें एक साथ सक्रिय हो गई हैं। यह स्थिति देश के सबसे भूकंप के लिए संवेदनशील इलाकों में से एक कच्छ के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
कच्छ पहले से ही कच्छ मेनलैंड फॉल्ट और साउथ वागड़ फॉल्ट समेत 10 से अधिक फॉल्ट लाइनों पर स्थित है। साल 2001 में इसी क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। अब 2025 में आ रहे झटकों से संकेत मिल रहा है कि भू-गर्भीय तनाव नए फॉल्ट सिस्टम की ओर फैल रहा है।
कच्छ विश्वविद्यालय, भुज के भू-विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव चौहान के अनुसार, अब तक एक्टिव माने जाने वाले नगर पार्कर और अल्लाह बंड फॉल्ट्स के अलावा, हाल के महीनों में कठरोल हिल और गोरा डोंगर पर भी भूकंपीय गतिविधि दर्ज हुई है। इससे साफ है कि 2025 की शुरुआत से तीनों फॉल्ट एक साथ सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि 1 से 3 तीव्रता के आफ्टरशॉक जमा हुई ऊर्जा को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे तुरंत बड़े भूकंप का खतरा कुछ कम हो सकता है। लेकिन कई फॉल्ट लाइनों का एक साथ सक्रिय होना भविष्य के लिए चेतावनी भी है।
भूकंप की तीव्रता भले ही कम रही, लेकिन इसका असर काफी बड़ा रहा। एक्सपर्ट के अनुसार, केवल 5 किलोमीटर की उथली गहराई और कच्छ की नरम चिकनी और अवसादी मिट्टी ने झटकों को और तेज महसूस कराया। यही कारण है कि लोग घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप वैज्ञानिकों ने चेताया है कि कच्छ में यदि कोई बड़ा भूकंप आता है, तो उसका असर केवल स्थानीय नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिमी भारत के बड़े हिस्से तक तेज झटके महसूस किए जा सकते हैं। चौहान ने इसे चेतावनी बताते हुए नियमित मॉक ड्रिल, भवन निर्माण नियमों के सख्त पालन और स्कूलों में आपदा प्रबंधन शिक्षा को अनिवार्य करने की जरूरत पर जोर दिया।
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