गुजरात में कच्छ का छारी-ढांड पक्षी विहार रामसर साइट सूची में शामिल, जानिए क्या होंगे इससे फायदे
रामसर साइट का दर्जा मिलने के साथ, छारी-ढांढ को अब वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे कच्छ में इको-टूरिज्म का विकास होगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार फंडिंग और तकनीकी सहायता के रास्ते भी खुल गए हैं।

गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शनिवार को बताया कि कच्छ जिले में स्थित छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची यानी रामसर साइट में शामिल किया गया है। मंत्री ने कहा कि नल सरोवर, थोल, खिजड़िया और वधवाना के बाद, छारी-ढांड गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला रामसर स्थल बन गया है।
मंत्नी ने कहा, छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर का दर्जा मिलने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय विकास और वैश्विक मान्यता जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह पर्यावरण पर्यटन के लिए भी एक पसंदीदा गंतव्य बनेगा।' 'रामसर कन्वेंशन' आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
साइट का दर्जा मिलने से होंगे यह फायदे
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामसर साइट का दर्जा मिलने के साथ छारी-ढांढ को अब वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे कच्छ में इको-टूरिज्म का विकास होगा और स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार फंडिंग और तकनीकी सहायता के रास्ते भी खुल गए हैं।
गुजरात में है देश के कुल वेटलैंड का 21 प्रतिशत
इस बारे में जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र का 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजरात में है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। इसमें कहा गया है कि गुजरात की आर्द्रभूमि लगभग 35 लाख हेक्टेयर में फैली हुई है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 17.8 प्रतिशत है।
पीएम मोदी ने गुजरात के लोगों को दी बधाई
मोढवाडिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की दूरदृष्टि से गुजरात आर्द्रभूमि संरक्षण में एक महत्वपूर्ण राज्य बन गया है। छारी ढांड को रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित लोगों को बधाई दी।
अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा, 'यह जानकर मुझे बेहद खुशी हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी विहार और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल का दर्जा मिला है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई।'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये मान्यताएं जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।'
सीएम ने कहा- जैव विविधता के लिए बेहतरीन खबर
उधर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने अपने संदेश में कहा, 'गुजरात की जैव विविधता के लिए बहुत अच्छी खबर। छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर स्थल के रूप में शामिल करना आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।' पटेल ने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति समग्र दृष्टिकोण की सफलता को दर्शाता है।
क्या होता है 'छारी ढांड' का मतलब?
बता दें कि कच्छ में मौजूद में इस पक्षी विहार को छारी-ढांड इसलिए कहा जाता है, क्योंकि स्थानीय भाषा में, 'छारी' का मतलब खारा होता है और 'ढांढ' का मतलब उथली झील होता है। लगभग 227 वर्ग किलोमीटर (22,700 हेक्टेयर) में फैला यह वेटलैंड रेगिस्तान और घास के मैदान के बीच एक अनोखा इकोसिस्टम है। साल 2008 में इसे गुजरात का पहला 'कंजर्वेशन रिजर्व' घोषित किया गया था।
सर्दियों में आते हैं हजारों तरह के प्रवासी पक्षी
छारी-ढांढ में 250 से ज़्यादा प्रजातियों के पक्षी देखे गए हैं। सर्दियों में, लगभग 25,000 से 40,000 प्रवासी पक्षी जैसे कॉमन क्रेन (कुंज), सोशिएबल लैपविंग और ग्रेट व्हाइट पेलिकन साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से यहां आते हैं। इसके अलावा, लेसर फ्लेमिंगो और ग्रेटर फ्लेमिंगो (हंज) के साथ-साथ सारस क्रेन भी यहां देखे जाते हैं। साथ ही डालमेटियन पेलिकन, ओरिएंटल डार्टर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क और कई शिकारी पक्षी जैसी लुप्तप्राय प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि न सिर्फ़ पक्षी, बल्कि यह क्षेत्र चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी, कैराकल, रेगिस्तानी बिल्ली और भेड़िया जैसे वन्यजीवों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आवास है।
गुजरात के मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. जयपाल सिंह, गांधीनगर वन्यजीव विंग टीम, मुख्य वन संरक्षक (कच्छ वन सर्कल, भुज) और उप वन संरक्षक, कच्छ (पश्चिम) वन प्रभाग, भुज के लगातार प्रयासों ने इस अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य और केंद्र सरकारों (वेटलैंड डिवीजन) के निरंतर मार्गदर्शन में, वेटलैंड संरक्षण और इसकी जैव विविधता के संरक्षण के लिए किए गए वैज्ञानिक प्रयासों के परिणामस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है।(एएनआई इनपुट के साथ)
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