State Dam Safety Organization report in Gujarat flags structural issues at 10 reservoirs of Gujarat गुजरात के इन 10 बांधों में मिली गंभीर खामियां, डैम सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने उठाए सवाल, Gujarat Hindi News - Hindustan
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गुजरात के इन 10 बांधों में मिली गंभीर खामियां, डैम सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने उठाए सवाल

रिपोर्ट में बताया गया है कि 'कई मामलों में कार्बोनेशन की गहराई कंक्रीट के ऊपर चढ़ी सुरक्षात्मक परत (कंक्रीट कवर) से अधिक पाई गई है, जो सरियों में जंग लगने की आशंका को दर्शाता है। वहीं pH वैल्यू से पता चलता है कि कंक्रीट एसिडिक हो चुका है, जिससे सरियों में जंग लगने की प्रक्रिया और तेज हो रही है।

Sun, 1 March 2026 09:57 AMSourabh Jain पीटीआई, गांधीनगर, गुजरात
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गुजरात के इन 10 बांधों में मिली गंभीर खामियां, डैम सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने उठाए सवाल

गुजरात में बांधों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। GSDSO (गुजरात राज्य बांध सुरक्षा संगठन) ने मोरबी जिले के दो प्रमुख बांधों डेमी-3 और माछू-2 को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है और इनकी संरचनात्मक स्थिति में गंभीर खामियां बताई हैं। शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई वर्ष 2024-25 की इस रिपोर्ट में राज्य के कुल 524 बांधों की सुरक्षा का आकलन किया गया है, जिनमें से कम से कम 10 जलाशयों में बड़े दोष पाए गए हैं।

डेमी-3 बांध को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा?

इस रिपोर्ट में डेमी-III डैम के बारे में चिंता जाहिर करते हुए कहा गया है कि बांध के 17 पियर (खंभों) में से जब पांच पियर (3, 6, 9, 12 और 14) की विस्तृत जांच की गई, तो काफी चिंताजनक परिणाम मिले। रिपोर्ट में कहा गया है, कोर टेस्ट में कंक्रीट की मजाबूती खराब पाई गई है। जिसे कम से कम 20 N/mm2 होना चाहिए था, वह मात्र 5 N/mm2 से 14 N/mm2 तक ही मिली। इसके अलावा अल्ट्रासोनिक और जीपीआर (GPR) टेस्ट में कंक्रीट के अंदर बहुत ज़्यादा खाली जगह मिली। कोर हिस्से में सीमेंट, रेत और पत्थर के बीच का जोड़ खत्म हो चुका है।

माछू-2 बांध की रिपोर्ट में क्या मिला?

मोरबी के ही माछू-2 बांध की निरीक्षण गैलरी में भारी रिसाव पाया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी गेटों को जल्द से जल्द बदलने की जरूरत है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डैम के सभी गेट के पुर्जों को बदलने का काम अभी चल रहा है और इसे मॉनसून शुरू होने से पहले पूरा करने का लक्ष्य है।

इन 8 बांधों में भी मिलीं खामियां

1. डॉन बांध- रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में मॉनसून के दौरान यहां बहुत ज़्यादा बाढ़ आ गई थी, इस दौरान स्पिलवे के ऊपर लगभग 3.60 मीटर तक पानी आ गया था, जिससे लगभग 25x25 मीटर के एरिया में स्पिलवे पैनल को बहुत नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा डैम की दाईं ओर की दीवार और टेल चैनल भूस्खलन से भी प्रभावित हुई थी।

2. भरपार बांध- यहां वेस्ट वियर और सुरक्षा दीवार बही मिली, जबकि डाउनस्ट्रीम टेल चैनल में लगातार गिरावट देखी गई।

3. खंभाला बांध- मिट्टी के इस डैम में ज़्यादा रिसाव देखा गया, साथ ही चिनाई में काफी छोटी-छोटी दरारें भी देखी गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि DSRP का साइट विज़िट प्लान है, और उनके निर्देश में बड़े रिपेयर का काम किया जाएगा।

4. कैला बांध- कटाव के कारण यहां टेल चैनल के डाउनस्ट्रीम में कंसंट्रेशन देखा गया,और इसी वजह से गैबियन सेटलमेंट की रिपोर्ट मिली।

5. वेन गडी बांध- मॉनसून के बाद आई बाढ़ में बांध की बॉडीवॉल और स्पिलवे एप्रन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। एप्रन को ठीक करने का काम पूरा हो गया है, और मॉनसून से पहले रिपेयर का काम चल रहा है।

6. फोडारनेस बांध- यहां स्पिलवे बॉडी की दीवार में दरारें और मिट्टी के बांध के ऊपर लंबी दरारें देखी गईं हैं।

7. मंजल-रेलाडिया बांध- वेस्ट वियर की दाईं ओर से बॉडी वॉल और एप्रन के कुछ हिस्से में कटाव हो गया था। रिपोर्ट के अनुसार, कटाव वाले हिस्सों को ठीक कर दिया गया है।

8. मालन बांध- रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां ऑटोमैटिक गेट के सपोर्ट लेग में जंग और फुलक्रम चैनल जॉइंट को नुकसान मिला, जिससे इसकी कार्यक्षमता और उम्र कम हो गई है। फिलहाल इसे बदलने का काम चल रहा था।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘कई मामलों में कार्बोनेशन की गहराई कंक्रीट के ऊपर चढ़ी सुरक्षात्मक परत (कंक्रीट कवर) से अधिक पाई गई है, जो सरियों में जंग लगने की आशंका को दर्शाता है। वहीं, pH वैल्यू से पता चलता है कि कंक्रीट एसिडिक हो चुका है, जिससे सरियों में जंग लगने की प्रक्रिया और तेज हो रही है। जियोफिजिकल जांच से भी पता चला है कि कंक्रीट की गुणवत्ता खराब थी। जीपीआर परीक्षणों में कंक्रीट कवर का अत्यधिक और अनियमित होना, साथ ही सरियों के बीच की दूरी का दोषपूर्ण पाया जाना सामने आया है।’

रिपोर्ट में सरकार ने बताया कि 'डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल' (DSRP) के विशेषज्ञ इन बांधों का दौरा कर रहे हैं और मॉनसून शुरू होने से पहले मरम्मत के अल्पकालिक कार्य पूरे किए जा रहे हैं, जबकि बड़ी संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए 'दीर्घकालिक सुधारात्मक कार्यों' (LTR) के तहत योजना बनाई गई है।

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