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गुजरात में शादी रजिस्ट्रेशन से पहले माता-पिता को नोटिस? प्रस्ताव पर उठे कानूनी सवाल

प्रस्तावित बदलावों के तहत शादी रजिस्टर कराने वाले जोड़ों को यह बताना होगा कि क्या उन्होंने अपने माता-पिता को विवाह की जानकारी दी है। यह बदलाव Gujarat Registration of Marriages Act, 2006 में संशोधन के जरिए लाने की तैयारी है।

Mon, 23 Feb 2026 08:56 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, अहमदाबाद
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गुजरात में शादी रजिस्ट्रेशन से पहले माता-पिता को नोटिस? प्रस्ताव पर उठे कानूनी सवाल

गुजरात सरकार ने शादी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस पर कानूनी जानकारों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रस्तावित बदलावों के तहत शादी रजिस्टर कराने वाले जोड़ों को यह बताना होगा कि क्या उन्होंने अपने माता-पिता को विवाह की जानकारी दी है। साथ ही, रजिस्ट्रेशन के दौरान संबंधित अधिकारियों के लिए माता-पिता को औपचारिक रूप से सूचित करना जरूरी होगा। यह बदलाव Gujarat Registration of Marriages Act, 2006 में संशोधन के जरिए लाने की तैयारी है।

माता-पिता की डिटेल देनी होगी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ड्राफ्ट के अनुसार बताया गया है कि आवेदन में माता-पिता के नाम, पता, आधार नंबर और कॉन्टेक्ट डिटेल्स देना होगा। इसके अलावा एक घोषणा पत्र देना होगा कि माता-पिता को शादी की सूचना दी गई है या नहीं। सहायक रजिस्ट्रार आवेदन की जांच के बाद 10 कार्यदिवस के भीतर माता-पिता को नोटिस भेजेगा और वैरीफिकेशन के बाद 30 दिनों में मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

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लव जिहाद, धोखाधड़ी… रोकने का तर्क

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम धोखाधड़ी या छल से होने वाली शादियों, खासकर भागकर की जाने वाली शादियों, पर अंकुश लगाने के लिए है। राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष सिंघवी ने कहा कि सरकार को सख्त नियम बनाने की मांग मिली थी। उन्होंने “लव जिहाद” जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए दावा किया कि फर्जी पहचान के मामलों को रोकना जरूरी है।

शादी के लिए परिवार की सहमति जरूरी नहीं-SC

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव लोगों के संवैधानिक अधिकारों से टकरा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डीबी गोस्वामी के अनुसार, राज्य रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तय कर सकते हैं, लेकिन वे संविधान की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकते। दो बालिग व्यक्तियों की शादी के लिए परिवार की सहमति जरूरी नहीं है- यह बात सुप्रीम कोर्ट कई बार दोहरा चुका है।

Shafin Jahan v Asokan KM (हादिया केस) और Laxmibai Chandaragi B. v State of Karnataka में अदालत ने स्पष्ट किया कि अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करना अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।

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अंतिम फैसला फीडबैक के बाद लिया जाएगा

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव शादी की वैधता नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन प्रोसेस से जुड़ा है। फिर भी, यदि रजिस्ट्रेशन में देरी या बाधा आती है, तो इसका व्यावहारिक असर पड़ सकता है। क्योंकि, शादी का सर्टिफिकेट कई कानूनी और प्रशासनिक कार्यों के लिए आवश्यक होता है। फिलहाल ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए खुला है और अंतिम फैसला फीडबैक के बाद लिया जाएगा।

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