भाजपा कार्यालय में चाय-पानी देने वाले को पार्टी ने दिया था गुजरात निकाय चुनाव में टिकट, जानिए क्या रहा परिणाम
नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद रमेश भाई भील ने कहा था कि मैंने 27 सालों तक पूरी लगन के साथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सेवा की है। अब पार्टी ने मुझे अपने वार्ड के लोगों की सेवा करने का अवसर दिया है।

गुजरात में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिए। इन चुनावों के लिए पार्टी ने मेहसाणा में अपने कार्यालय 'कमलम्' में बतौर चपरासी काम करने वाले और यहां लोगों को चाय-पानी परोसने वाले रमेश भाई भील को वार्ड नंबर 13 से मैदान में उतारा था। खास बात यह रही कि पार्टी का यह फैसला बिल्कुल सही साबित हुआ, क्योंकि रमेशभाई के साथ ही यहां पर भाजपा का पूरा पैनल जीत गया। यहां पर कुल 52 वार्डों के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 47 वार्डों में तो कांग्रेस को 5 वार्डों में सफलता मिली।
पार्षद पद पर उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बेहद खुश नजर आ रहे रमेश भाई ने जानकारी देते हुए बताया था कि 'पार्टी ने मुझे मेहसाणा में वार्ड नंबर 13 से टिकट दिया है, जो कि ST सीट है। मैं पिछले 27 सालों से यहां काम कर रहा हूं। अगर मैं जीत भी गया तो भी मैं अभी जो काम कर रहा हूं, वह काम आगे भी करता रहूंगा।' 50 साल के रमेश भील ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। वह पिछले 27 सालों से जिला मुख्यालय में काम कर रहे हैं। उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में कार्यालय का प्रबंधन करना और यहां आने वाले वरिष्ठ नेताओं तथा पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को चाय-पानी पिलाना शामिल था।
'नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हूं'
इससे पहले अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद भील ने कहा था कि मैंने 27 सालों तक पूरी लगन के साथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सेवा की है। अब पार्टी ने मुझे अपने वार्ड के लोगों की सेवा करने का अवसर दिया है। मैं उसी ईमानदारी के साथ इस नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।
'बैक-एंड' कार्यकर्ता से 'फ्रंटलाइन' पर आए
भारतीय जनता पार्टी ने रमेश भाई भील को 'बैक-एंड' कार्यकर्ता से वार्ड नंबर 13 के लिए एक 'फ्रंटलाइन' राजनीतिक उम्मीदवार बनाकर लोगों की जमकर वाहवाही लूटी थी। लोगों का कहना था कि यही एक पार्टी है, जहां एक कार्यकर्ता को इस तरह का सम्मान दिया जा सकता है। रमेश भाई को टिकट मिलने के बाद कई लोग उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देख रहे थे जिससे वे खुद को जोड़ पाते हैं और जो आम लोगों के रोजमर्रा के परेशानियों को समझता है। और उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह भी उनकी यही इमेज साबित हुई।
बता दें कि इससे पहले रविवार को गुजरात की 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में चुनावों के लिए मतदान हुआ था। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रियाओं में से एक माने जाने वाले इन चुनावों में, लगभग 9,200 सीटों पर 4.18 करोड़ से अधिक योग्य मतदाताओं ने हिस्सा लिया।
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