सरकार का बड़ा डिजिटल वार: AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, 3 घंटे में हटानी होगी फेक फोटो-वीडियो
भारत सरकार ने नए IT नियमों के साथ AI से बने फोटो-वीडियो पर लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। अवैध या डीपफेक कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे के अंदर हटाना होगा।

भारत सरकार ने डिजिटल दुनिया में बढ़ते डीपफेक और AI-जेनरेटेड भ्रामक कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए नए IT नियम आज 20 फरवरी से लागू कर दिए हैं। ये बदलाव Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) की ओर से किए गए हैं और ये मौजूदा Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में बदलाव के तौर पर लागू हुए हैं। इन बदलावों का बड़ा मकसद यह तय करना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार फोटो, वीडियो और ऑडियो का गलत इस्तेमाल ना हो और आम नागरिकों को गुमराह करने वाले कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
नए नियमों के चलते अब सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल इंटरमीडियरी को यह तय करना होगा कि AI से तैयार या मॉडिफाई किए गए कंटेंट पर साफ तौर से 'AI-Generated' या इसी तरह का लेबल लगाया जाए। यह लेबल ऐसा होना चाहिए जो यूजर को तुरंत दिखाई दे, ना कि किसी कोने में छिपा हुआ हो। सरकार का मानना है कि AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे जो देख रहे हैं, वह असली है या AI की मदद से तैयार किया गया है। इससे फेक न्यूज, डीपफेक वीडियो और छेड़छाड़ की गई फोटोज के असर को कम करने में मदद मिलेगी।
तय टाइम लिमिट में हटाना होगा कंटेंट
सबसे बड़ा बदलाव कंटेंट हटाने की समय-सीमा को लेकर है। अगर किसी पोस्ट को सरकारी एजेंसी या कानूनी एजेंसी की ओर से अवैध या हानिकारक माना जाता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को उसे तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। बिना-परमिशन वाले डीपफेक, अश्लील या किसी व्यक्ति की पहचान को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट जैसे सेंसिटिव मामलों में यह समय सीमा और भी सख्त हो सकती है। पहले ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए 24 से 36 घंटे तक का समय मिल जाता था लेकिन अब सरकार ने इसे काफी कम कर दिया है।
प्लेटफॉर्म्स की भी होगी जिम्मेदारी
नियमों में प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी साफ तौर पर तय की गई है। उन्हें AI कंटेंट की पहचान, मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग के लिए एक सिस्टम तैयार करना होगा। मेटाडेटा और ट्रेसिबिलिटी जैसे ऑप्शंस को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है जिससे किसी विवादित कंटेंट के सोर्स तक पहुंचा जा सके। अगर कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों को फॉलो नहीं कर पाता है, तो वह ‘सेफ हार्बर’ सेफ्टी खो सकता है, जिसका मतलब है कि उसे यूजर की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है।
इनोवेशन को मिलता रहेगा बढ़ावा
सरकार का कहना है कि ये नियम AI टेक्नोलॉजी के विकास को रोकने के लिए नहीं हैं, बल्कि उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए हैं। AI इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए नागरिकों की सुरक्षा और प्राइवेसी की रक्षा करना इसका मकसद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वक्त में यह कदम डिजिटल ट्रांसपैरेंसी बढ़ाने और ऑनलाइन ट्रस्ट रीस्टोर करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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