Why President Donald Trump in tension although US Iran reached on Ceasefire three points are important ईरान संग सीजफायर पर भले थपथपा लें अपनी पीठ, पर इन मुद्दों पर अब भी टेंशन में क्यों डोनाल्ड ट्रंप?, Explainer Hindi News - Hindustan
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ईरान संग सीजफायर पर भले थपथपा लें अपनी पीठ, पर इन मुद्दों पर अब भी टेंशन में क्यों डोनाल्ड ट्रंप?

ट्रंप ने ईरान की कट्टरपंथी धार्मिक सरकार को गिराने की बात कही थी लेकिन वह नहीं हो सका। हालाँकि, तेहरान में सीनियर अधिकारियों पर बार-बार हुए हमलों के बाद नेतृत्व में फेरबदल हुआ है, लेकिन यह बदलाव जरूरी नहीं कि पिछले नेतृत्व से बेहतर ही हो।

Wed, 8 April 2026 02:56 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान संग सीजफायर पर भले थपथपा लें अपनी पीठ, पर इन मुद्दों पर अब भी टेंशन में क्यों डोनाल्ड ट्रंप?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के साथ 28 फरवरी को शुरू हुआ अमेरिका-ईरान युद्ध अब 40 दिनों के बाद युद्ध विराम पर पहुंच गया है। मंगलवार की रात दोनों पक्षों की मौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की कोशिश के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच 10 दिनों के लिए अस्थाई युद्ध विराम पर सहमति बन गई है। ईरान के शत्रु देश इजरायल ने भी ईरान के साथ संघर्षविराम पर सहमति जताई है, लेकिन इजरायली रक्षा बल (IDF) ने यह भी कहा है कि वह लेबनान में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन के समयानुसार शाम 06:32 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 4:02 बजे) अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि वह ईरान पर नियोजित सैन्य हमलों को दो सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित कर देंगे। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी कुछ घंटे बाद संघर्ष विराम की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान होर्मुज समुद्री मार्ग से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा। संघर्षविराम की मध्यस्थता की पहल करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी दो सप्ताह के संघर्ष विराम की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान 10 अप्रैल से इसे अंतिम रूप देने के लिए शांति वार्ता करेंगे।

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अपनी-अपनी जीत के दावे

अब अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं और अपने हिसाब से इस युद्धविराम को अपनी कामयाबी बता रहे हैं लेकिन यह संघर्षविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए खुशी कम टेंशन ज्यादा लेकर आया है क्योंकि ट्रंप के कई मंसूबे और उद्देश्य अधूरे रह गए हैं, जबकि अपनी दस सूत्रीय मांगों के जरिए ईरान ने रणनीतिक रूप से इस सीजफायर में बढ़त बना ली है।

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किन तीन मुद्दों पर ट्रंप को टेंशन

दरअसल, जो सीजफायर समझौता हुआ है, उसमें यूरेनियम पर ट्रंप के हाथ खाली हैं क्योंकि ईरान जहां फारसी में अपने लोगों को यह समझा रहा है कि उसके पास यूरेनियम संवर्धन का अधिकार रहेगा और इसे अमेरिका के सामने स्वीकार करने की शर्त रखी गई है, वहीं अंग्रेजी बयान में इस पर स्पष्टता का अभाव है। ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है। इसे ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है कि जो अमेरिका ईरान की 5000 साल पुरानी सभ्यता मिटाने चला था, वह इस मुद्दे पर चुपचाप क्यों बैठ गया?

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ईरान के पास अभी भी 441 KG यूरेनियम

बता दें कि ईरान के पास अभी भी 441 किलोग्राम 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, जो लगभग 10 न्यूक्लियर वॉरहेड के लिए फिसाइल मटीरियल बनाने के लिए काफी है। यह मटीरियल जमीन के काफी नीचे ऐसी जगहों पर दबा हुआ है जहाँ तक अमेरिकी पहुंच नहीं हो सकी है। अमेरिकी हवाई हमले भी उनका बाल बांका नहीं कर सके। ऐसे में आशंका है कि ईरान फिर संभावित रूप से न्यूक्लियर हथियार बना सकता है। यही बात अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर ट्रंप की इमेज को नुकसान पहुंचा रही है।

होर्मुज पर अब भी हाथ खाली

दूसरा, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को अभी तक फ्री नेविगेशन के लिए फिर से नहीं खोला जा सका है, जबकि सीजफायर समझौते में इसे तुरंत खोलने की बात कही गई थी। ट्रंप के लिए तीसरी बड़ी टेंशन उनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा है। अमेरिका में ट्रंप ने अपनी लोकप्रियता खोई है। अमेरिकी संसद में उनका भारी विरोध हो रहा है, जबकि अगले छह महीनें में द्विवार्षिक चुनाव होने हैं।

कट्टरपंथी धार्मिक सरकार गिराने में भी नाकाम

दूसरी तरफ, उन्होंने ईरान की कट्टरपंथी धार्मिक सरकार को गिराने की बात कही थी लेकिन वह नहीं हो सका। हालाँकि, तेहरान में सीनियर अधिकारियों पर बार-बार हुए हमलों के बाद नेतृत्व में फेरबदल हुआ है, लेकिन यह बदलाव जरूरी नहीं कि पिछले नेतृत्व से बेहतर ही हो। अब सत्ता सीनियर IRGC अधिकारियों और उनके सहयोगी धर्मगुरुओं के हाथों में आ चुकी है, जिनमें से कई कट्टरपंथी धार्मिक चरमपंथी मुख्य भूमिका में हैं, जबकि ट्रंप ईरान से कट्टरपंथी धार्मिक सरकार को हटाने के लिए जोर लगा रहे थे। हालाँकि ट्रंप और उनकी टीम का कहना है कि उनका इरादा कभी भी ईरान की धार्मिक सरकार को गिराने का नहीं था।

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