मंगल भवन अमंगल हारी…सीरियल रामायण में नहीं इस फिल्म में गाई गई थी ये चौपाई
हिंदी फिल्मों में भजनों और भक्ति गीतों को पसंद किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं तुलसीदास की लिखी हुई रामायण की ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ इस चौपाई की फिल्म में किसने गाया और किसने इसे धुनों में पिरोया?

हिंदी सिनेमा में कई ऐसी धार्मिक फिल्म बनीं जिसने ऑडियंस के मन में भक्ति की लहर पैदा की। 70 और 80 के दशक में ऐसी कई फिल्में बनीं जिनकी कहानियों से भक्त और भगवान के बीच की दूरी को कम किया। इन्हीं फिल्मों में भगवान के कई गीत गाए गए, भजन सुनाए गए और चौपाई धुन और लय के साथ मिलक रूहानी बन गई। इन भजनों और गानों ने ऑडियंस की रूह को छुआ और आज भी कई गीत मशहूर हैं। ऐसी ही एक फिल्म 1975 में आई थी गीत गाता चल। ये फिल्म रविंद्रनाथ टैगोर की अथिति पर आधारित थी। लेकिन फिल्म के गीतों ने जैसे कमाल कर दिया। इसी फिल्म में रामायण की चौपाई थी 'मंगल भवन अमंगल हारी' थी। इसे जब पहली बार धुनों और लय के साथ सुना तो जैसे कमाल हो गया।
किसने गई रामायण की चौपाई
1975 में आई फिल्म गीत गाता चल में सचिन पिलगांवकर और सारिका ने लीड रोल निभाया था। फिल्म के डायरेक्टर थे हिरेन नाग और प्रोड्यूसर थे ताराचंद बड़जात्या। ये एक अनाथ श्याम की कहानी थी जो नाच-गाकर अपनी जिंदगी गुजार रहा है। वो भजनों को गाता है। सचिन के किरदार श्याम पर ही रामायण की चौपाई 'मंगल भवन अमंगल हारी' फिल्माई गई थी। लेकिन असल में इसे जसपाल सिंह ने गाया था और इसे तुलसीदास ने लिखा था। इसके बाद इस चौपाई को रामानंद सागर की रामायण में भी सुनाया गया। रामायण के लिए रविंद्र जैन ने गाया था। म्यूजिक भी उन्होंने ही तैयार किया था।
जसपाल ने गाए ये शानदार गाने
फिल्म गीत गाता चल के सभी गाने बहुत पसंद किए गए थे। लेकिन गीत गाता चल, श्याम तेरी बंसी पुकारे, कर गया कान्हा, श्याम अभिमानी जैसे गाने जबरदस्त हिट हुए थे। इन सभी गानों को जसपाल सिंह ने ही गाया था। ऐसा कहा जाता था कि जसपाल की आवाज सचिन पर जमती थी। उन्होंने सचिन के लिए कई गाने गाए जैसे नदिया के पार के लगभग सभी गाने अंगना में आई बहार भौजी, जोगी जी धीरे धीरे, सांची कहें, गाए थे। इसके अलावा जसपाल ने कई भक्ति गीतों को अपनी आवाज दी। ऐसा भी कहा जाता था कि उन्हें धार्मिक गीत गाने के लिए टाइपकास्ट कर दिया गया था।
जसपाल के गीतों ने बनाई पहचान
जसपाल के गाए अधिकतर गानों को रविंद्र जैन ने अपने म्यूजिक से सजाया था। कई गीतों के बोल भी उन्होंने ही लिखे। मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के वक्त में जसपाल के इन गीतों ने अलग पहचान बनाई जो ऑडियंस पसंद आई।
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