ऐसे शुरू हुई थी गोविंदा की मां की इस एक्टर के साथ लव स्टोरी, पिता की इस फिल्म ने डुबो दी परिवार की किस्मत
गोविंदा के पिता की वो फिल्म जिसने उन्हें राजा से रंक बना दिया था। इसी फिल्म की वजह से गरीबी में गुजरा गोविंदा का बचपन। मां निर्मला देवी भी थी उस समय की टॉप की हीरोइन। ऐसी थी मां की लव स्टोरी।

बॉलीवुड एक्टर गोविंदा की गिनती इंडस्ट्री के सबसे टैलेंटेड कलाकारों में की जाती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक गोविंदा का नाम दुनिया के सबसे जबरदस्त एक्टर्स लिस्ट के टॉप 10 में शामिल है। बहुत कम लोग जानते हैं कि गोविंदा को एक्टिंग की ये कला विरासत से मिली है। गोविंदा के पिता अरुण आहूजा खुद एक समय के बड़े एक्टर थे। गोविंदा ने अपने कई इंटरव्यू में इस बारे में जिक्र किया है कि कैसे उनके पिता का सारा पैसा एक फिल्म में डूब गया। लेकिन उस फिल्म के बारे में और पिता के एक्टिंग करियर के बारे में कम ही लोग जानते हैं। पिता अरुण कुमार की लव स्टोरी भी खूबसूरत है।
गोविंदा के पिता की पहली फिल्म
गोविंदा के पिता अरुण कुमार का असली नाम गुलशन सिंह आहूजा था। लेकिन महबूब खान जब एक्टर्स की तलाश में थे तब उन्होंने गुलशन को अपना नाम बदलने की सलाह दी। और इस तरह गुलशन, अरुण आहूजा बन गए जिनका ताल्लुक पंजाब के एक खत्री परिवार से था। गोविंदा के पिता सिर्फ एक्टिंग में नहीं, बल्कि गायिकी में भी माहिर थे। लेकिन पहले उनके फिल्मी सफर की बात करते हैं। अरुण आहूजा को 1939 में आई फिल्म ‘एक ही रास्ता’ में महबूब खान ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म के बाद उन्होंने ‘औरत’, ‘बेटी’, ‘बंबई की सैर’, ‘अंधेरा’, ‘कारवां’, ‘आम्रपाली’ में काम किया। ये सभी फिल्में 40 के दशक में रिलीज हुई थीं। इन फिल्मों के साथ अरुण कुमार इंडस्ट्री जे स्टार बन गए थे। कई फिल्में सफल हुई।

सिंगिंग में थे माहिर
अरुण आहूजा ने फिल्मों के साथ गायन में किस्मत अजमाई। उन्होंने उस समय के कई मशहूर गाने गाए, जैसे ‘हाय दिल हाय जिगर कर गई वर कलेजे पार’ ये गाना फिल्म बेटी में था, इसके बाद ‘मैं नदी के किनारे खड़ा हूं, मेरे राजा, आम के पेड़ के नीचे आओ’,’भोली सी भिलनिया डांस’, ‘आज भाग जाग रहा है’। ये सभी गाने ऑडियंस ने पसंद किए थे।
पिता की लव स्टोरी
अरुण आहूजा की जिंदगी में सब कुछ ठीक ही चल रहा था। इसी फिल्मों के सफर के दौरान उनकी मुलाकात उस समय की मशहूर गायिका निर्मला देवी से हुई। निर्मला देवी ने गायन के साथ एक्टिंग में भी कदम रखा था। 1942 में आई फिल्म सवेरा से निर्मला देवी ने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था। इस फिल्म के हीरो अरुण कुमार थे। इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच प्यार हुआ और 1942 में ही शादी कर ली। शादी के बाद भी दोनों ने कई फिल्मों में काम किया। इस शादी से दोनों के 5 बच्चे भी हुए जिसमें से गोविंदा सबसे छोटे थे।

इस फिल्म पर लगाया था पैसा
अरुण कुमार ने फिल्मों में काम करने के दौरान अपना प्रोडक्शन भी शुरू किया और अपने करियर की पहली और आखिरी फिल्म प्रोड्यूस की। किसी को नहीं पता था कि ये फिल्म आहूजा परिवार को आसमान से जमीन पर ले आएगी। इस फिल्म का नाम था सेहरा जो 1948 में आई थी। इस फिल्म में माया देवी और खुद अरुण कुमार ने बतौर एक्टर काम किया था।
फिल्म की कहानी नहीं आई पसंद
फिल्म की कहानी की बात करें तो ये एक दुखद लव स्टोरी थी। फिल्म मुराद नाम के शख्स की कहानी थी जिसका किरदार अरुण आहूजा ने निभाया था। मुराद कबीले के सरदार का बेटा था और उसे दूसरे दुश्मन कबीले के सरदार की बेटी शहनाज से यानी माया देवी से प्यार हो जाता है। लेकिन दोनों अपने कबीले वालों को झूठ बोलते हैं जिससे दो लोगों की जान चली जाती है। फिल्म का अंत दुखद था। शायद इसलिए फिल्म ऑडियंस को पसंद नहीं आई। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म का नतीजा बुरा और दिल तोड़ने वाला था। इस फिल्म पर गोविंदा के पिता ने अपना सारा पैसा लगा दिया था। सारी जमापूंजी भी लग गई। उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म सफल हुई तो सब दोगुना वापस आ जाएगा। लेकिन हुआ उसका उल्टा ही। अरुण आहूजा ने अपनी मेहनत से जितना भी पैसा कमाया था सब फिल्म के प्लॉप होने के साथ डूब गया। हालत ऐसी हो गई थी कि अरुण कुमार आहूजा को अपने बीवी बच्चों के साथ जुहू के बंगले को छोड़ विरार के चॉल में आकर बसना पड़ा। विरार में ही बीता था गोविंदा का बचपन।
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