इस मशहूर घराने से ताल्लुक रखते हैं गोविंदा, नाना ने उस्तादों को सिखाया संगीत, मामा दुनियाभर में मशहूर
बॉलीवुड एक्टर गोविंदा के ननिहाल के बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कौन थे गोविंदा के नाना? मशहूर घराने से ताल्लुक रखती थीं गोविंदा की मां। जानिए कौन-कौन है गोविंदा के ननिहाल में।

बॉलीवुड एक्टर गोविंदा इंडस्ट्री का बड़ा नाम है। 80 और 90 के दशक में एक्टर ने अपने करियर की सबसे शानदार फिल्मों में काम किया। इन्हीं फिल्मों की वजह से एक्टर को आज पहचाना जाता है। गोविंदा अक्सर अपने कई इंटरव्यू में अपने स्टारडम का श्रेय अपनी मां निर्मला देवी को देते आए हैं। एक्टर के मुताबिक पिता अरुण कुमार के निधन के बाद उनकी मां ने जिंदगी भर रेडियो और कलाकारों के लिए गायन कर अपने 5 बच्चों का पालन किया। लेकिन असल में निर्मला देवी कौन थीं?
गोविंदा का ननिहाल
गोविंदा ने अपने इंटरव्यू में मां की गायिकी की बात की है। उनके पिता अरुण आहूजा के एक्टर थे बस यही जानकारी अधिकतर लोग जानते हैं। लेकिन असल में गोविंदा का परिवार कला के क्षेत्र में बहुत मशहूर है। गोविंदा का ननिहाल मशहूर घराने से ताल्लुक रखता है। निर्मला देवी के पिता और गोविंदा के नाना जी वासुदेव नारायण गहरवाल राजपूत और वाराणसी के मशहूर जौहरी थे। ऐसा कहा जाता है कि नाना वासुदेव ही उस समय वाराणसी का चांदी का बाजार खुद अपने हाथों से खोलते थे। इसके अलावा उनका संगीत से जुड़ाव था, संगीत सिखाते थे। उन्होंने ही खुद पटियाला घराने के उस्ताद उता उल्लाह खान को अपने घर 10 सालों तक रखा, उन्हें अपने बच्चों के साथ संगीत की शिक्षा दी थी। गोविंदा की नानी कुसुम फैजाबाद की रहने वाली थीं। ऐसा कहा जाता है कि गोविंदा के नाना-नानी के चार से अधिक बच्चे थे। सबसे बड़ी बेटी गोविंदा की मां निर्मला देवी, जो शास्त्रीय संगीत जानती थीं। गोविंदा ने खुद अपने इंटरव्यू में बताया कि कैसे उनकी मां राज कपूर और कई बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म किया करती थीं।

गोविंदा के मामा
गोविंदा के नाना वासुदेव की दूसरी संतान तबला वादक लच्छू महाराज थे। लच्छू महाराज अपने तबला वादन के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं असल में गोविंदा के सगे मामा हैं। इसके बाद आनंद का जन्म हुआ। आनंद जिनका पूरा नाम उदय सिंह नारायण था। आनंद ने कई फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार निभाया। खुद गोविंदा को फिल्मों में लाने वाले आनंद ही थे। ऐसा कहा जाता है कि वासुदेव के और भी बच्चे थे जो अब वाराणसी में राजपूत ज्वेलर के तौर पर सोने और चांदी का बिजनेस कर रहे हैं।
गोविंदा का परिवार
कला के क्षेत्र में कई दशकों से जुड़ा हुआ है। मां संगीत के साथ फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। पिता 40 और 50 के दशक में मशहूर फिल्मों का हिस्सा रहे थे। लेकिन इनकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया कि बंगले में रहने वाले गोविंदा को चॉल में जीवन बीताना पड़ा। अंत में उन्होंने फिर से मेहनत की और वापस उसी दुनिया में पहुंच गए।
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